नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को वकीलों से न्याय प्रणाली के प्रशासनिक पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि उन्हें केवल ‘‘शिकायत दर्ज कराने’’ से आगे बढ़ना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) द्वारा उन्हें सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब ‘‘बार और बेंच’’ प्रशासनिक नवाचार की जिम्मेदारी साझा करते हैं, तो संक्रमण काल के दौरान भी प्रणाली के अधिक विश्वासनीय बने रहे की संभावना होती है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि एक तैयार, नैतिक और अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत बार न्याय प्रशासन को मजबूत करता है, और ऐसे बार को प्रोत्साहित करके और उसकी ताकत को स्वीकार करके, व्यवस्था की नींव को मजबूत किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘बार को केवल शिकायतें दर्ज कराने तक सीमित न रहकर सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। मैं बार के सदस्यों से न्याय प्रशासन में पूरी तरह से शामिल होने का आह्वान करता हूं, ताकि वे व्यावहारिक सुझाव दें, नयी प्रणालियों को आगे बढ़ाएं और परामर्श प्रक्रियाओं में भाग लें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सुधार न केवल नेक इरादे से किए गए हों, बल्कि व्यावहारिक भी हों।’’
डीएचसीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने कुछ ‘‘गंभीर संस्थागत चिंताओं’’ को रेखांकित किया, जैसे कि अपर्याप्त आधारभूत ढांचा और उच्च न्यायालय से न्यायाधीशों के रूप में वकीलों की ‘‘पदोन्नति के अवसर में कमी’’।
हरिहरन ने कहा, ‘‘47,000 अधिवक्ताओं के बावजूद, अगस्त 2024 से अब तक केवल तीन को ही न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि वे उच्च न्यायालय में की गई किसी भी नियुक्ति पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। हरिहरन ने उच्च न्यायालय में रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश