एलडीएफ ने केरल मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा में देरी को लेकर कांग्रेस की आलोचना की
एलडीएफ ने केरल मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा में देरी को लेकर कांग्रेस की आलोचना की
तिरुवनंतपुरम (केरल), 12 मई (भाषा) केरल में विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने मंगलवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के चयन में देरी को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) पर हमला बोला और आरोप लगाया कि गठबंधन जनादेश का सम्मान करने में ‘विफल’ रहा है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) संयोजक टी. पी. रामकृष्णन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘कांग्रेस और यूडीएफ को जनादेश का सम्मान करने के लिए तैयार रहना चाहिए।’
उन्होंने यहां एलडीएफ की बैठक में भाग लेने के बाद कहा, ‘राज्य की जनता ने सरकार बनाने के लिए यूडीएफ के पक्ष में मतदान किया। कांग्रेस और यूडीएफ का नैतिक दायित्व है कि वे बदले में उनके साथ न्याय करें।’
उन्होंने आरोप लगाया कि नई सरकार के गठन से पहले ही वे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अपनाई जा रही थीं जो सामान्यतः शासन का हिस्सा होनी चाहिए।
रामकृष्णन ने दावा किया कि सरकारी कर्मचारियों का तबादला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा तैयार की गई सूचियों के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के औपचारिक गठन से पहले ही उठाए गए ऐसे कदम लोकतांत्रिक प्रथाओं के अनुरूप नहीं थे।
उन्होंने सप्लाईको डिपो के माध्यम से चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों का हवाला देते हुए, यूडीएफ पर ‘जनविरोधी कदम’ उठाने का भी आरोप लगाया ।
रामकृष्णन ने कहा कि पिछली एलडीएफ सरकार ने 13 आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि नहीं की थी और बाद में कीमतों में संशोधन केवल कैबिनेट के निर्णय के बाद ही किया गया था।
उन्होंने कहा, “अब खबरें आ रही हैं कि सप्लाईको डिपो के माध्यम से वितरित किए जाने वाले चावल की कीमत में दो रुपये की वृद्धि की गई है। यह कदम बेहद निंदनीय है।”
उन्होंने कहा कि एलडीएफ विकास और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए नयी सरकार को पूरा समर्थन देगा और सभी जायज मुद्दों पर सहयोग करेगा।
रामकृष्णन ने मुख्यमंत्री के चुने जाने से पहले विपक्ष के नेता का चयन करने की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा, “पहले सरकार का गठन होना चाहिए। मुख्यमंत्री के बाद विपक्ष के नेता का चयन करने में क्या समस्या है?”
उन्होंने कहा कि शासन का मतलब सिर्फ मुख्यमंत्री का चयन करना नहीं है, बल्कि मंत्रियों का चयन करना और विभिन्न विभागों के कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करना भी है।
उन्होंने कहा, “यह देरी एक गलत प्रथा है जिसकी आलोचना होनी चाहिए।”
विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर एलडीएफ की अपनी योजनाओं का जिक्र करते हुए रामकृष्णन ने कहा कि इस मामले में कोई देरी या विवाद नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि माकपा के पोलित ब्यूरो ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने का जिम्मा पार्टी की राज्य इकाई को सौंपा है।
रामकृष्णन ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘विपक्षी नेता के चयन को लेकर कोई विवाद नहीं है। इसके लंबा खिंचने या इससे मतभेद का मुद्दा उत्पन्न होने की कोई संभावना नहीं है। माकपा जल्द से जल्द इस पर फैसला लेगी।’’
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री बनने का फैसला हो चुका होता और नेता प्रतिपक्ष का पद अनसुलझा रहता तो आलोचना जायज होती।
उन्होंने कहा, ‘‘एलडीएफ को नेता प्रतिपक्ष का चयन करने में कोई कठिनाई नहीं है।’’
रामकृष्णन ने एलडीएफ में दूसरे सबसे बड़े घटक दल -भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) द्वारा विपक्ष के उपनेता पद पर दावा किए जाने की खबरों पर कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जब माकपा ने इन दोनों पदों को अपने पास ही रखा था।
उन्होंने माकपा के दिवंगत नेताओं वी. एस. अच्युतानंदन और कोडियेरी बालकृष्णन का उदाहरण दिया, जिन्होंने विधानसभा में क्रमशः नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य किया था।
भाकपा के राज्य सचिव विनय विश्वम द्वारा इस मामले पर लिखे गए कथित खुले पत्र का जिक्र करते हुए रामकृष्णन ने कहा कि ऐसे मुद्दों को मोर्चे के भीतर आंतरिक चर्चाओं के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने विश्वम के खुले पत्र के बारे में पढ़ा। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मोर्चे के भीतर चर्चा होनी चाहिए, और मुझे नहीं लगता कि इन्हें सार्वजनिक रूप से उठाना सही तरीका है।’’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नयी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और उप-नेता प्रतिपक्ष के पदों पर एलडीएफ ने फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
राज्य में नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने सत्ताधारी एलडीएफ को हराकर निर्णायक जनादेश के साथ सत्ता में वापसी की। माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ केरल में प्रमुख विपक्षी गठबंधन के रूप में उभरा।
भाषा राखी माधव
माधव

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