नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) वाम मोर्चे के शीर्ष नेताओं ने शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के परिणाम को मंगलवार को युवा आंदोलन की “महत्वपूर्ण जीत” करार दिया। उन्होंने छात्रों के खिलाफ कथित “दमनकारी कार्रवाई” को तत्काल बंद करने की मांग भी की।
चारू भवन में आयोजित बैठक में भाकपा महासचिव डी राजा, माकपा महासचिव एमए बेबी और भाकपा (माले) लिबरेशन महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत तीनों दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
इसमें मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और साझा मुद्दों पर आपसी समन्वय मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में वाम दलों ने अपने छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान प्रदर्शित उस “साहस, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प” के लिए बधाई दी, जिसके जरिये उन्हें “पुलिस की दमनकारी कार्रवाई का डटकर सामना किया।”
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।
वाम दलों ने कहा कि सभी भाजपा शासित राज्यों को जंतर-मंतर एमनेस्टी समझौते का सम्मान करना चाहिए और छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ कथित “दमनकारी कार्रवाई” बंद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन की भावना को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा युवाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में व्यापार संघ, किसान, ग्रामीण मजदूर और महिला मोर्चों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति बनी। साथ ही कामकाजी लोगों को आर्थिक राहत देने और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की गई।
भाषा राखी नरेश पारुल
पारुल