नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने देश से नक्सलवाद समाप्त होने के सरकार के दावे पर सोमवार को कहा कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या ‘भूभाग’ (टेरेन) जीतने से नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों का विश्वास (ट्रस्ट) जीतने से हल होगी।
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा में नियम 193 के तहत भारत को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के मुद्दे पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि बड़ी विडंबना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ऊर्जा संकट से निपटने की योजना बताने के बजाय सरकार अचानक वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा करा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह चर्चा इसलिए कराई जा रही कि सरकार और गृह मंत्री अपनी पीठ थपथपाना चाहते हैं।’’
मोइत्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नक्सलवाड़ी से शुरू हुई माओवादी हिंसा की विचारधारा रातोंरात नहीं पनपी, बल्कि इसके मूल में सामाजिक-आर्थिक कारण, राजनीतिक कारण, आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधन छिनना और उनकी अनदेखी होना है।
उन्होंने कहा कि इसे कानून व्यवस्था की समस्या की तरह नहीं सुलझाया जा सकता।
मोइत्रा ने कहा कि आज भाजपा दावा कर रही है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या को सुलझा लिया गया है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार दावा कर रही है कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र इस समस्या से मुक्त हो रहे हैं तो आज भी बस्तर में इतनी बड़ी संख्या में सैन्य शिविर क्यों हैं।’’
मोइत्रा ने कहा, ‘‘हमें वास्तव में इस समस्या को समाप्त करने के लिए विश्वास जीतना होगा। भूभाग जीतने से समाधान नहीं निकलेगा।’’
चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अभय कुमार सिन्हा ने दावा किया कि नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिए स्थानीय जरूरतों और कमी का आकलन नहीं किया जाता तथा जन प्रतिनिधियों से कोई सुझाव नहीं लिया जाता।
उन्होंने कहा कि आज भी देश में ऐसे अनेक गांव हैं जहां विकास नहीं पहुंचा है और जिन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का दावा अब तक अधूरा है।
सिन्हा ने कहा कि स्थानीय सामाजिक संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों, सांसदों-विधायकों समेत जन प्रतिनिधियों आदि से फीडबैक लेकर ही योजनाएं सफल हो सकती हैं।
भाषा वैभव सुभाष
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