Owaisi on Naxalism: ‘…तो भविष्य में फिर से बढ़ सकती है हिंसा’.. लोकसभा में ओवैसी ने सरकार को दी चेतावनी, कहा- गहरी है नक्सलवाद की जड़ें

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'...तो भविष्य में फिर से बढ़ सकती है हिंसा'.. लोकसभा में ओवैसी ने सरकार को दी चेतावनी, Parliament Discussion on Naxalism: Owaisi Statement

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 06:03 PM IST

Owaisi on Naxalism. Image Souorce- Sansad TV Video Grab

HIGHLIGHTS
  • असदुद्दीन ओवैसी ने नक्सलवाद पर सरकार के दावों पर उठाए सवाल
  • सिर्फ सरेंडर से नहीं खत्म होगी समस्या, विचारधारा अब भी मौजूद: ओवैसी
  • गवर्नेंस, विकास और पुनर्वास की कमी से फिर बढ़ सकती है हिंसा की आशंका

नई दिल्लीः Owaisi on Naxalism: लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा हो रही है। यह चर्चा नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार की दी गई 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले हो रही है। इस अहम विषय को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ हथियार डालने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि विचारधारा अभी भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरेंडर कर रहे हैं, उन्होंने कहीं भी अपनी विचारधारा को त्यागने की बात नहीं कही है। ओवैसी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 1977 में भी सीपीआई (एमएल) ने कुछ समय के लिए अपने सशस्त्र संघर्ष को रोका था, लेकिन बाद में फिर हथियार उठा लिए। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह स्थायी समाधान नहीं बल्कि एक टैक्टिकल रिट्रीट हो सकता है। उन्होंने चारू मजूमदार का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सल आंदोलन की जड़ें गहरी हैं और इसे केवल सैन्य कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता।

Owaisi on Naxalism: ओवैसी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जेल में नक्सल नेताओं से बातचीत की है और उनकी सोच आज भी वैसी ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सिर्फ यह मान ले कि नक्सलवाद खत्म हो गया है, तो यह एक बड़ी भूल होगी। ओवैसी ने आगे कहा कि देश के कई इलाकों में जहां नक्सलवाद कम हुआ है, वहां अब न तो नक्सल हैं और न ही सही गवर्नेंस पहुंची है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन और विकास वहां नहीं पहुंचे, तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़ी है। आदिवासी इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से भरे इलाकों में रहने वाले लोगों को उसका फायदा नहीं मिलता, जिससे असंतोष बढ़ता है।

ओवैसी ने दी चेतावनी

ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर गवर्नेंस, राहत और पुनर्वास पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में फिर से हिंसा बढ़ सकती है। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं ने सरकार नहीं, बल्कि गवर्नेंस बदलने के लिए आंदोलन किया। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़, घरों को तोड़ना और समाज में डर का माहौल बनाना कट्टरता को बढ़ावा देता है। ओवैसी ने कहा कि किसी भी तरह का उग्रवाद, चाहे वह वामपंथी हो या दक्षिणपंथी, देश के लिए खतरा है और इसे रोकने के लिए संतुलित और संवेदनशील नीति जरूरी है।

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ओवैसी ने नक्सलवाद को लेकर क्या मुख्य चिंता जताई?

ओवैसी ने कहा कि नक्सलियों के सरेंडर करने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि उनकी विचारधारा अब भी जिंदा रहती है और भविष्य में फिर उभर सकती है।

क्या नक्सलवाद सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा है?

ओवैसी के अनुसार, यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़ा एक जटिल मुद्दा है।

चारू मजूमदार का नक्सलवाद से क्या संबंध है?

चारू मजूमदार नक्सल आंदोलन के प्रमुख विचारक और संस्थापक नेताओं में से एक थे, जिनकी विचारधारा आज भी आंदोलन की जड़ों में मौजूद मानी जाती है।

ओवैसी ने किन खतरों की चेतावनी दी?

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गवर्नेंस, राहत और पुनर्वास पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में फिर से हिंसा और उग्रवाद बढ़ सकता है।

“टैक्टिकल रिट्रीट” से ओवैसी का क्या मतलब था?

इसका मतलब है कि नक्सली अस्थायी रूप से पीछे हट सकते हैं, लेकिन यह उनकी स्थायी हार नहीं होती—वे भविष्य में फिर सक्रिय हो सकते हैं।