नई दिल्लीः Amit Shah on Naxalism: लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा हो रही है। यह चर्चा नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार की दी गई 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देश की संसद को संबोधित कर रहे हैं। लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस बहस के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्षों से चाहते थे कि उनकी स्थिति संसद में उठे और दुनिया जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह मौका नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच पर पहुंची है।
Amit Shah on Naxalism: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद की विचारधारा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि इस विचारधारा का मूल क्या है और इसका ध्रुव वाक्य क्या है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत ने आजादी के बाद “सत्यमेव जयते” को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया, जबकि नक्सल विचारधारा का आधार “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसे सिद्धांत पर टिका है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सोच हिंसा को बढ़ावा देती है।
अमित शाह ने कहा कि देश में कई लोग अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन भारत अब अंग्रेजों के शासनकाल में नहीं है, जहां सशस्त्र संघर्ष को जायज ठहराया जा सके। उन्होंने आदिवासी नायक बिरसा मुंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी तुलना नक्सलियों से करना पूरी तरह गलत है, क्योंकि उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठें और एकजुट होकर देश से नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम करें। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि नक्सली विचारधारा से जुड़े लोग अपने ही लोगों का खून बहाने में भी संकोच नहीं करते।