Kangna Ranaut on Rahul Gandhi: ‘टपोरी की तरह आते है राहुल गाँधी, देखकर असहज महसूस होता है’.. भाजपा की इस फायरब्रांड सांसद ने सुनें और क्या कहा..

Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi: कंगना रनौत ने राहुल गांधी को बताया टपोरी, पूर्व ब्यूरोक्रैट्स के पत्र पर बढ़ा विवाद, संसद व्यवहार पर सवाल

Kangna Ranaut on Rahul Gandhi: ‘टपोरी की तरह आते है राहुल गाँधी, देखकर असहज महसूस होता है’.. भाजपा की इस फायरब्रांड सांसद ने सुनें और क्या कहा..

Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi || Image- ANI News File

Modified Date: March 18, 2026 / 02:26 pm IST
Published Date: March 18, 2026 2:25 pm IST
HIGHLIGHTS
  • कंगना का राहुल गांधी पर हमला
  • ब्यूरोक्रैट्स के पत्र से बढ़ा विवाद
  • संसद व्यवहार पर उठे सवाल

नई दिल्ली: देश और दुनिया के मामलों पर बेबाक राय और अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘टपोरी’ करार दिया है। (Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi) पीटीआई से हुई बातचीत में कंगना ने चार-धाम के मंदिरों में गैर-सनातनियों की एंट्री बैन किये जाने के सवाल पर भी अपने प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी को लेकर असहज महिला सांसद!

दरअसल 100 से ज्यादा पूर्व ब्यूरोक्रैट्स ने राहुल गाँधी के आचरण पर खत लिखा है। इसी से जुड़े सवाल पर कंगना रनौत ने कहा कि, “महिला सांसदों को अक्सर राहुल गांधी के आसपास असहज महसूस होता है क्योंकि वे संसद में बेहद अनुशासनहीन तरीके से व्यवहार करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई इंटरव्यू दे रहा होता है, तो वे अनुचित टिप्पणियों से उसे बीच में ही रोक देते हैं। (Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi) उनका व्यवहार बेहद असहज होता है। उन्हें अपनी बहन से सीखना चाहिए, उनका आचरण और व्यवहार बहुत अच्छा है और वे शिष्टाचार का पालन करती हैं।”

चारा धाम के मंदिरों में गैर हिन्दुओं के प्रवेश के सवाल पर कहा कि, हम सब सनातनी है, यहां हर कोई सनातनी है। ऐसे में इसे मानने या लिखने देने में कोई घबराहट नहीं होनी चाहिए”

‘कर्तव्य का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल’ : भाजपा

राहुल गांधी के खिलाफ 84 पूर्व नौकरशाहों , 116 पूर्व सैनिकों और पूर्व वकीलों द्वारा लिखे गए पत्र पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा, “प्रतिष्ठित नागरिकों द्वारा राहुल गांधी से माफी मांगने वाला यह पत्र स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

भाजपा ने आरोप लगाया कि, राहुल गांधी ने अपने असभ्य कृत्यों और अभद्र व्यवहार से बार-बार संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने और हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया है। (Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi) दूसरा, संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह राहुल गांधी का निंदनीय दुर्व्यवहार देश के युवाओं को बहुत गलत संदेश दे रहा है क्योंकि वे वास्तव में विपक्ष के नेता के रूप में अपने घृणित, गैर-जिम्मेदार और अभद्र व्यवहार को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

क्या कहा था पूर्व-ब्यूरोक्रैट्स ने?

दरअसल पिछले दिनों सैकड़ों रिटायर्ड नौकरशाहों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खत लिखते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर संसद की गरिमा और मर्यादा को कमज़ोर करने का आरोप लगाया था और कांग्रेस नेता से माफ़ी की मांग की थी। पत्र में कहा गया कि ऐसे काम संसदीय मर्यादा को कमज़ोर करते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी कमज़ोर बनाते हैं, खासकर तब जब विपक्ष का नेता इसमें शामिल हो। पत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि संसद देश का सर्वोच्च संवैधानिक मंच है और इसकी गरिमा को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए।

हस्ताक्षर वाले खत में कहा कि गांधी और विपक्ष के अन्य सांसदों को संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्किट खाते हुए देखा गया। उन्होंने इस कृत्य को अनुचित और संसदीय गरिमा के विपरीत बताया। (Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi) पूर्व ब्यूरोक्रैट्स में तर्क दिया कि संसद की सीढ़ियाँ किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन या सांकेतिक विरोध का स्थान नहीं हैं, और ऐसा व्यवहार इस संस्था के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है।

संसद “लोकतंत्र का मंदिर”

पत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि संसद को “लोकतंत्र का मंदिर” माना जाता है, जहाँ राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए। लेकिन, ऐसी गतिविधियाँ संसद को सार्थक विचार-विमर्श के मंच के बजाय राजनीतिक नौटंकी का मंच बना देती हैं। हस्ताक्षरकर्ता पूर्व अफसरों ने तर्क दिया कि संसद के अंदर और बाहर गांधी के कृत्य सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिराते हैं और संसदीय कार्यवाही में बाधा डालते हैं, जिसके परिणामस्वरूप जनता के समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों ने उनके व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहा कि, वे ‘विपक्ष के नेता’ जैसे संवैधानिक पद पर आसीन हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार से सवाल पूछना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग करते समय देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए। (Letter from Former Bureaucrats on Rahul Gandhi) उनके आचरण को लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने के लिए हानिकारक बताते हुए, हस्ताक्षरकर्ताओं ने गांधी से राष्ट्र से माफ़ी मांगने और अपने व्यवहार पर आत्मचिंतन करने की अपील की।

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