तिरुवनंतपुरम, एक जनवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने बृहस्पतिवार को कहा कि जो परिवार घोर गरीबी के दलदल से बाहर निकल चुके हैं, उन्हें वापस उसी स्थिति में नहीं जाने दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसी के साथ नव निर्वाचित स्थानीय स्वशासन निकायों से कल्याणकारी कार्यक्रमों को बनाए रखने में अधिक जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया।
विजयन ने स्थानीय निकाय चुनावों के बाद सभी स्तरों पर नए शासी निकायों के कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव चरण समाप्त हो गया है, और अब ध्यान शासन और कार्य निष्पादन पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘चुने हुए प्रतिनिधियों के सामने अब नई जिम्मेदारियां हैं।’’
विजयन ने 1995 के बाद के उस दौर को याद किया जब ‘पीपुल्स प्लानिंग कैंपेन’ द्वारा समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कई नई विकास और कल्याणकारी पहल शुरू की थीं। उन्होंने कहा कि आज स्थानीय निकाय कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं।
मुख्यमंत्री ने घोर गरीबी उन्मूलन को एक प्रमुख चुनौती बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक सर्वेक्षणों से सबसे कमजोर परिवारों की पहचान करने, उनकी जरूरतों का आकलन करने और सूक्ष्म स्तर की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलती है, जिससे समयबद्ध हस्तक्षेप संभव हो पाते हैं।
उन्होंने उल्लेख किया कि एक नवंबर, 2025 को, ‘केरल पिरवी’ (राज्य के स्थापना दिवस) के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष विधानसभा सत्र के दौरान केरल को अत्यधिक गरीबी से मुक्त घोषित किया गया था।
विजयन ने कहा, ‘‘जो लोग घोर गरीबी की दलदल से निकल चुके हैं, उन्हें दोबारा उसमें नहीं गिरना चाहिए। विभिन्न कारणों से जो लोग उसमें फंस जाते हैं, उन्हें उससे बाहर निकालना होगा।’’
भाषा धीरज रंजन
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