नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) लोकसभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंजूरी दे दी।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक दल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तेदेपा और कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने विधेयक के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया। वाईएसआर पार्टी के नेता मिथुन रेड्डी का कहना था कि उनकी पार्टी विधेयक के वर्तमान स्वरूप को प्रदेश के हित के खिलाफ मानती है।
कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा भी पूरा करना चाहिए।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें यह कहने में खुशी हो रही है कि इस संबंध में आंध्र प्रदेश विधानसभा से आए संकल्प पर लोकसभा में सभी ने सहमति व्यक्त की है।
उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश विधानसभा में 28 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें भारत सरकार से राज्य (आंध्र प्रदेश) की राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक दर्जा दिलाने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की कुछ धाराओं में संशोधन करने का अनुरोध किया गया।
उन्होंने कहा कि ‘‘विधेयक में यह उपबंध किया गया है कि निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर अमरावती एक नयी राजधानी होगी।’’
राय ने सदन को बताया कि राज्य विधानसभा के 28 मार्च 2026 के संकल्प को प्रभावी बनाने के लिए और आंध्र प्रदेश राज्य की राजधानी (अमरावती) के संबंध में वैधानिक स्पष्टता लाने के उद्देश्य से 2014 के अधिनियम की कुछ धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
मंत्री के जवाब के बाद, सदन ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना न सिर्फ नीतिगत विफलता है, बल्कि प्रदेश के साथ अन्याय है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए।
भाजपा के सांसद सी.एम. रमेश ने कहा कि वह ‘डबल इंजन’ की सरकार पर विश्वास करते हैं तथा राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार अगले 30 वर्षों तक बरकरार रहेगी।
उन्होंने कहा कि विधेयक के पारित होने के बाद राजधानी के रूप में अमरावती का कोई ‘‘एक इंच भी इधर-उधर’’ नहीं कर सकेगा।
रमेश ने विधेयक का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को दिया।
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेदेपा ने अमरावती को स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने वाले विधेयक को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की प्रतिबद्धता के कारण यह दिन देखना संभव हुआ।
तेदेपा सांसद और केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने चर्चा में भाग लेते हुए इस विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भी धन्यवाद किया।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद मिथुन रेड्डी ने विधेयक के वर्तमान स्वरूप का विरोध करते हुए कहा कि यह आंध्र प्रदेश के हित में नहीं है।
आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने विधेयक के विरोध में लोकसभा से बहिर्गमन भी किया।
रेड्डी ने यह आरोप भी लगाया कि अमरावती को राजधानी बनाने के नाम पर लूट की जा रही है।
इससे पहले, राय ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में चर्चा और पारित किये जाने के लिए पेश किया।
यह प्रस्तावित कानून अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी बनाने के निर्णय को भविष्य में बदल दिए जाने के किसी भी ऐसे प्रयास को रोक देगा, जैसा कि वाईएसआर कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा किया गया था।
बीते 28 मार्च को राज्य विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें आंध्र प्रदेश की नयी राजधानी के रूप में ‘‘अमरावती’’ का नाम शामिल करने के मकसद से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा पांच में संशोधन के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया।
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद वर्ष 2014 और 2019 के बीच राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में तेदेपा प्रमुख नायडू ने घोषणा की थी कि अमरावती राज्य की राजधानी होगी और इसके विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा।
हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में तेदेपा ने सत्ता गंवा दी और रेड्डी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
अपने कार्यकाल के दौरान रेड्डी ने नायडू के फैसले को बदल दिया और घोषणा की कि आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां होंगी, जिसके तहत विशाखापत्तनम को प्रशासनिक राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी घोषित किया गया।
वर्ष 2024 में नायडू ने सत्ता में लौटने के बाद, घोषणा की कि अमरावती राज्य की एकमात्र राजधानी होगी।
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था। उस अधिनियम के तहत हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाया गया, लेकिन इसमें इस बात का कोई उल्लेख नहीं था कि आंध्र प्रदेश की राजधानी कहां बनेगी।
तेदेपा राजग की एक प्रमुख सहयोगी है और लोकसभा में अपने 16 सांसदों के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार का हिस्सा है।
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