अयोग्यता संबंधी याचिका पर लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए

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अयोग्यता संबंधी याचिका पर लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 11:17 AM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 11:17 AM IST

नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को, उन्हें दल-बदल रोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के अनुरोध वाली तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर उनसे जवाब मांगा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

तृणमूल के ये 20 सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं। लोकसभा सचिवालय ने 25 अगस्त को इन सांसदों को नोटिस जारी किया है जिसके साथ 18 जून को बनर्जी की ओर से सांसदों के खिलाफ दायर याचिका की प्रति भी भेजी गई है। बनर्जी ने यह याचिका लोकसभा सदस्यों की दल-बदल के आधार पर अयोग्यता संबंधी नियमावली, 1985 के नियम छह के तहत दायर की है।

सूत्रों ने बताया कि सचिवालय ने सांसदों से कहा है कि वे नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर याचिका पर अपनी राय दें।

यह घटनाक्रम उच्चतम न्यायालय द्वारा बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत होने के एक दिन बाद हुआ है जिसमें अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुई जिसमें अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी पर सवाल उठाया गया था।

शीर्ष अदालत ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और सदन के महासचिव को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर किया कि लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और महासचिव की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हो रहे हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, ‘‘सवाल नोटिस जारी करने का नहीं है; सवाल एक तय समय-सीमा के भीतर कार्यवाही पूरी करने का है।’’

बनर्जी ने पहले 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता संबंधी अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं और बाद में कार्यवाही के जल्द निपटारे का अनुरोध किया था। अभिषेक बनर्जी ने 27 जुलाई को फिर से पत्र भेजने के बाद इस मुद्दे पर 12 अगस्त को ओम बिरला से मुलाकात भी की थी।

यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में उस समय पैदा हुआ, जब उसके 20 लोकसभा सदस्यों ने घोषणा की कि वे त्रिपुरा के राजनीतिक संगठन ‘एनसीपीआई’ में शामिल हो गए हैं या उसका हिस्सा बन गए हैं। बागी सांसदों ने लोकसभा में अपने लिए अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की थी।

इसके बाद इन बागी सांसदों को संसद में एनसीपीआई का समूह माना गया और उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की संसदीय गतिविधियों में भी हिस्सा लिया।

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सभी सांसद उसके चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे और किसी दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के बराबर है।

पार्टी के अनुसार, ऐसे में संविधान के दल-बदल रोधी कानून के तहत उन्हें अयोग्य करार दिया जाना चाहिए।

वहीं, बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम वैध विलय के दायरे में आता है।

याचिका में नामित सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सयानी घोष, बापी हलदर, मोहम्मद अबू ताहेर खान, कालीपद सरेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा