(तस्वीरों सहित)
चेन्नई, 12 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के कई शहरों में बृहस्पतिवार को पेट्रोल पंपों के बाहर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, क्योंकि वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के गहराते संकट के बीच लोगों ने घबराहट में वाहनों में भी ईंधन भरवाना शुरू कर दिया। व्यावसायिक एलपीजी की कमी के कारण राज्य के अनेक भोजनालय बंद होने या व्यंजन सूची में भारी कटौती करने को मजबूर हो गए हैं।
हालांकि तेल विपणन कंपनियों और राज्य सरकार के अधिकारियों ने बार-बार आश्वासन दिया है कि पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों में चिंता बढ़ गई है।
चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै के निवासियों ने बताया कि उन्हें अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए 45 मिनट से अधिक इंतजार करना पड़ा। कुछ लोग नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त कंटेनर भी लेकर आए।
चेन्नई के उपनगरीय ताम्बरम में एक वरिष्ठ नागरिक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि इलाके के दो पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें हैं, ऐसे में उन्हें अपने दोपहिया वाहन में बिना ईंधन भरवाए ही लौटना होगा।
उन्होंने कहा, “कम से कम आधे घंटे का इंतजार करना पड़ रहा था, इसलिए मैं वापस लौट आया।”
आतिथ्य क्षेत्र इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
तमिलनाडु होटल एसोसिएशन के अनुसार, हजारों छोटे और मध्यम रेस्तरां इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
चेन्नई के कई प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों ने अपने गैस भंडार को बचाने के लिए डोसा और फ्राइड राइस जैसे अधिक गैस खपत वाले व्यंजन परोसना बंद कर दिया है और उनकी जगह साधारण भाप में पके व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
यह संकट परिवहन क्षेत्र तक भी पहुंच गया है, विशेषकर सीएनजी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा प्रभावित हुए हैं।
सीमित संख्या में चालू गैस वितरण केंद्रों पर घंटों इंतजार के कारण बृहस्पतिवार को चेन्नई में लगभग एक चौथाई ऑटो सड़कों से नदारद रहे। वहीं जो ऑटो चल रहे हैं, उन्होंने लंबे इंतजार की भरपाई के लिए किराये में काफी वृद्धि कर दी है।
संकट का असर चेन्नई के आईटी सेक्टर पर भी पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, एचसीएल ने अपने चेन्नई कार्यालय के कर्मचारियों को 12 और 13 मार्च को घर से काम करने का विकल्प दिया है, क्योंकि गैस की कमी के कारण कंपनी की कैंटीन का संचालन प्रभावित हुआ है।
इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की तमिलनाडु इकाई ने महंगाई और गैस की कमी के विरोध में 14 मार्च को राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है।
एक बयान में भाकपा के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका से ‘‘अनुमति’’ मांगकर राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता किया है।
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष एम. अप्पावु ने भी केंद्र सरकार पर निजी क्षेत्रों के हितों को साधने के लिए कृत्रिम अभाव पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि चार दिन पहले ही केंद्र ने दावा किया था कि गैस, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार 30 दिनों तक के लिए उपलब्ध है।
अप्पावु ने कहा, “यदि एक महीने के लिए पर्याप्त गैस और ईंधन था तो वह कहां गया? वास्तव में कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि कमी पैदा की जा रही है।”
भाषा खारी सुरेश
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