नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायलय से कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को जमानत दिए जाने के कुछ ही देर बाद उनकी 24-वर्षीय बेटी सहर शब्बीर शाह शीर्ष अदालत के बाहर फूट-फूटकर रोने लगीं और इसे ‘न्याय के लिए लंबे इंतजार का अंत’ बताया।
उच्चतम न्यायालय परिसर के बाहर अकेली खड़ी, एमबीए स्नातक सहर ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ द्वारा उनके पिता की लंबी कैद को ध्यान में रखते हुए उन्हें 2017 के आतंकवाद-वित्तपोषण मामले में राहत प्रदान किये जाने से पहले गहन चिंता और प्रार्थना की एक रात का वर्णन किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जून 2025 में गवाहों को प्रभावित करने की आशंकाओं का हवाला देते हुए शब्बीर शाह को जमानत देने से इनकार कर दिया था।
सहर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “कल रात मेरी जिंदगी की सबसे कठिन रातों में से एक थी। मैं पूरी रात उपवास और प्रार्थना करती रही।”
सहर ने कहा, “मुझे पूरी रात और आज सुबह भी घबराहट के दौरे पड़ते रहे, क्योंकि मेरे मन में सिर्फ एक ही बात थी– मैं अपने पिता के लिए न्याय मिले बिना घर नहीं लौटूंगी।”
जब आखिरकार जमानत की खबर आयी, तो सुनवाई के दौरान उन्होंने जो संयम बनाए रखा था, वह नहीं रहा।
सहर ने कहा, “मैं अदालत के बाहर फूट-फूटकर रोने लगी। मैं लगभग दो घंटे तक रोती रही। अब भी मेरा रोना रुक नहीं रहा है, क्योंकि इतने सालों के दर्द के बाद यह पल मुझे अवास्तविक सा लग रहा है।”
भाषा राजकुमार सुरेश
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