नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक महिला अधिवक्ता की ओर से किए गए उस विशेष उल्लेख का संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि लखनऊ जिला अदालत परिसर में बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने उनके और उनके पक्षकार के साथ मारपीट की।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने महिला वकील से अपनी समस्याएं साझा करते हुए कहा, ‘‘मैं अपने कक्ष में जाने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति राजन रॉय से भी इस विषय पर चर्चा करूंगा। न्यायमूर्ति रॉय लखनऊ जिला अदालतों के प्रशासनिक न्यायाधीश भी हैं।’’
प्रधान न्यायाधीश ने आमतौर पर शीर्ष अदालत में वकालत करने वाली इस महिला वकील को अपनी शिकायत लेकर न्यायमूर्ति रॉय के पास जाने को कहा।
मामले का उल्लेख दिन की अदालती कार्यवाही समाप्त होने के समय किया गया। इस पीठ में न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश हुई अधिवक्ता ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए पीठ से कहा, ‘यह मामला बेहद संवेदनशील और जरूरी है। मैं लखनऊ जिला अदालत में एक सुनवाई के सिलसिले में गई थी। विपक्षी पक्षकार बार एसोसिएशन का पदाधिकारी है। वह हमें अदालत में पेश नहीं होने दे रहा है। उसने हमारे साथ मारपीट की है। हमारा पक्षकार अब भी बार एसोसिएशन के दफ्तर में उनके कब्जे में है और उनके पास हथियार भी है।’
महिला वकील के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से उन्हें यह कहकर उच्चतम न्यायालय जाने की सलाह दी गई कि यदि मामला इतना ही जरूरी है तो वे वहीं अपनी बात रखें।
इसके बाद, सीजेआई ने उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठतम न्यायाधीश और जिला अदालतों के प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाले न्यायमूर्ति रॉय से तुरंत संपर्क करने का निर्देश दिया।
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सुमित सुरेश
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