मालवीय नगर आग्निकांड: दिल्ली सरकार की बी एंड बी नीति के नियमों पर सवाल खड़े हुए

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मालवीय नगर आग्निकांड: दिल्ली सरकार की बी एंड बी नीति के नियमों पर सवाल खड़े हुए

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 06:46 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 06:46 PM IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के मालवीय नगर में लगी भीषण आग में 12 विदेशियों सहित 21 लोगों की मौत के एक दिन बाद, दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (बीएंडबी) नीति में अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को अनिवार्य नहीं करने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस नीति का आधिकारिक नाम ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अतुल्य भारत) बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2007’ है और यह 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन इसमें सुरक्षा मानदंडों के संबंध में गंभीर खामियां हैं।

हौज रानी इलाके में स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में बुधवार को भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई जिनमें से 12 विदेशी नागरिक हैं। इस होटल को इस नीति के तहत ही लाइसेंस मिला हुआ था। हालांकि होटल को सिर्फ छह कमरों का संचालन करने की अनुमति थी।

दिल्ली के पूर्व मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेश पवार ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, ‘राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान जब दिल्ली में बी एंड बी योजना शुरू की गई थी, तब एक प्रावधान था कि आवासीय भवन में मालिक का रहना अनिवार्य था, जिसे बाद में योजना से हटा दिया गया। इस दुर्घटना में हमने देखा कि मालिक उनके साथ नहीं रह रहा था।’

पवार ने कहा कि नीति में अग्निशामक यंत्रों या अग्नि सुरक्षा के लिए कोई प्रावधान नहीं था।

उन्होंने कहा कि केवल एक बिंदु ऐसा था जिसमें कहा गया था कि हीट और स्मोक डिटेक्टर वांछनीय होने चाहिए, जिससे उनकी स्थापना पूरी तरह मालिक के विवेक पर निर्भर हो जाती है।

पवार ने कहा, “मेरा मानना है कि नीति में हीट और स्मोक डिटेक्टरों को अनिवार्य किया जाना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि योजना के प्रारंभिक चरण में स्थानीय अधिकारियों से अनुमोदित भवन योजना प्रदान करने का प्रावधान शामिल था।

पवार ने कहा, ‘लेकिन लगभग छह महीने बाद, यह प्रावधान हटा दिया गया। अगर यह प्रावधान बना रहता, तो यह प्रतिष्ठान (संबंधित होटल) इतने भीड़भाड़ वाले इलाके में कभी खुल ही नहीं पाता। उस समय भी इसकी अनुमति केवल छह कमरों और 18 लोगों के ठहरने की क्षमता तक ही सीमित थी।’

पवार ने कहा, ‘दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को आग बुझाने का बहुत अच्छा अनुभव है। वे अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हैं। आग बुझाने के मामले में मैं किसी को भी दिल्ली दमकल सेवा से बेहतर नहीं मानता। मैंने यहां काम किया है और अपने कर्मियों और अधिकारियों को देखा है।’

उन्होंने कहा, ‘जब हम इस योजना का व्यवसायीकरण कर रहे थे, तब अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र (एनओसी) का प्रावधान अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए था।’

भाषा नोमान नोमान रंजन

रंजन