(वरुण भंडारी)
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी आग के दौरान भयावह मंजर को बयां करते इराकी नागरिक हबीब आबिद ने बताया कि उन्होंने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई लेकिन अपने 29 साल के रिश्तेदार अली आमिर मूसा को बचा नहीं पाये।
अली आमिर मूसा अपने परिवार के उन तीन सदस्यों के साथ बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में ठहरे थे जहां बुधवार को लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
हादसे में मारे गए लोगों में 12 विदेशी नागरिक थे जिनके रिश्तेदारों का इलाज पास के अस्पतालों में चल रहा था।
हबीब आबिद (50) ने बताया कि परिवार लगभग एक सप्ताह से उस इमारत में रह रहा था क्योंकि उनके 18-19 वर्षीय बेटे हैदर का साकेत के एक अस्पताल में मस्तिष्क के ट्यूमर का इलाज चल रहा था।
उन्होंने बताया कि आग ऊपरी मंजिलों में तेजी से फैली, जिससे गलियारे घने धुएं से भर गए और दृश्यता में भारी गिरावट आने के कारण इमारत में रह रहे लोगों को खिड़कियों से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने पड़े।
हबीब ने बताया, ‘‘मैं पांचवीं मंजिल पर था। मैं इसलिए बच गया क्योंकि मैं खिड़की के रास्ते इमारत से बाहर निकल गया।’’
उन्होंने बताया कि आग लगने के समय अली सो रहा था और इमारत में जो कुछ हुआ वह समझने का उसे मौका ही नहीं मिला। ‘‘मुझे बस घना काला धुआं ही दिखाई दे रहा था।’’
हबीब ने उस भायवह मंजर को याद करते हुए कहा, ‘‘अली की मौत सीढ़ियों से उतरने की वजह से हुई और वह बच नहीं सका।’’
उन्होंने बताया कि उनका बेटा अब भी अस्पताल में उपचाराधीन है। उन्होंने कहा कि वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुर्दाघर से अली का शव प्राप्त करने के लिए औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं।
त्रासदी के एक दिन बाद भी, होटल की ओर जाने वाली संकरी गली को पुलिस और फोरेंसिक टीमों द्वारा क्षतिग्रस्त इमारत का निरीक्षण जारी रखने के कारण बंद रखा गया है।
भाषा धीरज रंजन
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