कोलकाता, चार जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के ‘मनमाने’ और ‘त्रुटिपूर्ण’ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तुरंत रोकने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंच सकती है।
तीन जनवरी को लिखे एक कड़े पत्र में बनर्जी ने आयोग पर आरोप लगाया कि उसने एक ऐसी प्रक्रिया का संचालन किया है जो ‘अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी वाली और आननफानन में शुरू की गई’ है और जिसमें ‘गंभीर अनियमितताएं, प्रक्रियात्मक उल्लंघन और प्रशासनिक चूक’ शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को लिखे गए उनके दो पूर्व पत्रों के बावजूद जमीनी स्थिति और बिगड़ गई है।
ममता ने लिखा, ‘‘मैं एक बार फिर आपको पत्र लिखकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करने के लिए विवश हूं।’’ ममता ने याद दिलाया कि उन्होंने 20 नवंबर और दो दिसंबर के पत्रों में भी इसी तरह के मुद्दे उठाए थे।
ममता ने निष्कर्ष निकाला कि जिस तरीके से इस समय एसआईआर किया जा रहा है वह भरोसेमंद नहीं है और यह लोकतंत्र की नींव पर चोट करता है।
मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘‘कुल मिलाकर ये कमियां दर्शाती हैं कि वर्तमान में संचालित एसआईआर प्रक्रिया गंभीर रूप से दोषपूर्ण है और हमारे लोकतंत्र के मूलभूत ढांचे पर प्रहार करती है।’’
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ‘अपरिवर्तनीय क्षति’ और ‘बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने’ की स्थिति से बचने के लिए इस प्रक्रिया को रोकना होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारियों को उचित या एकसमान प्रशिक्षण नहीं दिया गया था, जबकि उपयोग में लाए जा रहे आईटी प्रणाली ‘दोषपूर्ण, अस्थिर और अविश्वसनीय’ थी।
उन्होंने लिखा, ‘‘समय-समय पर जारी किए गए निर्देश असंगत और अक्सर विरोधाभासी होते हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर स्पष्टता और योजना की कमी ने ‘इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक मजाक बना दिया है’ और ‘चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर किया है।’’
बनर्जी ने आयोग की तैयारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी निर्वाचन आयोग एसआईआर के ‘सटीक उद्देश्यों, तौर-तरीकों और अंतिम लक्ष्यों’ के बारे में अनिश्चित प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि इस प्रक्रिया को समयबद्ध बताया जा रहा है, लेकिन इसमें कोई स्पष्ट, पारदर्शी या समान रूप से लागू होने वाली समयसीमा नहीं है।’’
उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्य अलग-अलग मानदंडों का पालन कर रहे हैं, जिसके चलते समयसीमा में मनमाने ढंग से बदलाव किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्देशों को जारी करने के ‘बेहद अनौपचारिक’ तरीके पर चिंता जताई।
उन्होंने लिखा, “महत्वपूर्ण निर्देश लगभग प्रतिदिन जारी किए जा रहे हैं, अक्सर व्हाट्सएप संदेशों और टेक्स्ट संदेशों जैसे अनौपचारिक माध्यमों से।’’
उन्होंने यह भी कहा कि इतने संवैधानिक महत्व के कार्य के लिए कोई उचित लिखित अधिसूचना, परिपत्र या वैधानिक आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं।
बनर्जी ने चेतावनी दी कि इस तरह की अनौपचारिकता से ‘सटीकता, पारदर्शिता या जवाबदेही की कोई गुंजाइश नहीं बचती’ और इससे गंभीर अनियमितताओं (जिनमें वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने की संभावना भी शामिल है) का खतरा है।
गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत वैधानिक प्राधिकारियों यानी मतदाता पंजीकरण अधिकारियों की जानकारी या अनुमोदन के बिना, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणालियों के दुरुपयोग के माध्यम से मतदाताओं के नाम गुप्त रूप से हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि ऐसे कार्यों को किसने अधिकृत किया है और किस कानूनी अधिकार के तहत ऐसा किया है। ईसीआई को उसके पर्यवेक्षण या निर्देशन में किए गए किसी भी अवैध, मनमाने या पक्षपातपूर्ण कार्यों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’
भाषा संतोष नरेश
नरेश