भारतीय सशस्त्र सेनाओं को समर्पित होगा 53वां विश्व पुस्तक मेला; निशुल्क मिलेगा प्रवेश

भारतीय सशस्त्र सेनाओं को समर्पित होगा 53वां विश्व पुस्तक मेला; निशुल्क मिलेगा प्रवेश

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  • Publish Date - January 8, 2026 / 05:03 PM IST,
    Updated On - January 8, 2026 / 05:03 PM IST

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक मेला इस बार भारतीय सशस्त्र सेनाओं को समर्पित रहेगा जिसका आयोजन दस से 18 जनवरी तक यहां भारत मंडपम में किया जा रहा है। विश्व पुस्तक मेले में इस बार प्रवेश नि:शुल्क रहेगा जिससे पाठकों के भारी संख्या में मेले में आने की संभावना है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास(एनबीटी) ने यहां बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मेले का उद्घाटन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। उनके साथ कतर और स्पेन के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमडंल भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

नौ दिनों तक चलने वाले 53वें नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1000 से अधिक प्रकाशकों के 3000 से ज्यादा स्टॉल शामिल होंगे। यहां 600 से अधिक आयोजनों में 1000 से ज्यादा वक्ता संवाद करेंगे और 20 लाख से अधिक लोगों के इसमें शामिल होने की सभांवना है।

पहली बार पुस्तक मेले में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तकों और ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाने के सिद्धांत को सुदृढ़ करता है।

पुस्तक मेले का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के तत्वधान में किया जाता है। भारत व्यापार सवंर्द्धन सगंठन इसका सह-आयोजक है।

इस बार पुस्तक मेले का थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास : शौर्य एवं विवेक” होगा।

यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एनबीटी के अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के साहस, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका को सम्मानित करते हुए 1,000 वर्ग मीटर का एक खास मडंप तैयार किया गया है। इस मडंप में 500 से अधिक पुस्तकें, चयनित प्रदर्शनी, पोस्टर, डॉक्यूमेंट्री और इंस्टॉलेशन प्रदर्शित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि मुख्य आकर्षण में अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि तथा 1947 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक के प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल रहेंगे। 100 से अधिक थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

एनबीटी अध्यक्ष ने बताया कि इसके साथ ही, मेले में वंदेमातरम के 150 वर्ष और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर उनके जीवन और योगदान को समर्पित विशेष प्रदर्शनियां भी प्रस्तुत की जाएंगी।

मेले में इस बार कतर को सम्मानित अतिथि देश एवं स्पेन को फोकस देश के रूप में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, रूस, जापान, पोलैंड, फ्रांस, अबुधाबी, ईरान, कज़ाख़स्तान, हंगरी, चिली सहित अनेक देशों के प्रकाशक, लेखक और सांस्कृतिक संस्थान इसमें भागीदारी करेंगे।

अतिथि देश के तौर पर कतर की भागीदारी पर भारत में कतर के राजदूत, मोहम्मद हसन जाबिर अल जाबेर ने नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले को “दुनिया के सबसे प्रमुख सांस्कृतिक मंचों में से एक” बताया।

उन्होंने कहा, “भारत और कतर दो प्राचीन सभ्यताएं हैं जो समृद्ध इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई हैं। कतर का मानना ​​है कि किताब सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली माध्यम है जो भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं से परे जाकर मानवीय समझ को बढ़ावा देता है। यह पुस्तक मेला विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक जीवंत जगह होगी और हमें उम्मीद है कि कतर की भागीदारी इस कार्यक्रम को और समृद्ध करेगी।’

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मेले में भाग लेने वाले कतर के प्रतिनिधमंडल में महिला अधिकारी और लेखिकाएं भी शामिल होंगी।

दोहा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के निदेशक जसीम अहमद अल बुऐनैन ने कहा, ‘भारत और कतर के बीच सांस्कृतिक संबंध गहरे हैं। पुस्तक मेले में कतरी पवेलियन में, हमारे संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख प्रकाशनों को गतिविधियों और लाइव कार्यक्रमों में दिखाया जाएगा। ये कार्यक्रम इस संस्कृति को आकार देने में भारतीय प्रवासी समुदाय के महत्व पर भी प्रकाश डालेंगे।’

पुस्तक मेले में पहली बार, लीपज़िग बुक फेयर, बोलोग्ना चिल्ड्रन्स बुक फेयर, सियोल इंटरनेशनल बुक फेयर, तुयाप फेयर्स एंड एग्जीबिशन (तुर्की), फ्रैंकफर्ट बुकमेसे, बुक वर्ल्ड प्राग (चेक रिपब्लिक), गुटेनबर्ग बुक फेयर (स्वीडन) और अन्य का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 इंटरनेशनल बुक फेयर डायरेक्टर भी हिस्सा लेंगे।

भाषा नरेश प्रशांत

प्रशांत