मणिपुर संघर्ष: मेइती समूह ने कश्मीरी पंडितों से तुलना कर ‘नस्ली सफाई’ का जताया खतरा

मणिपुर संघर्ष: मेइती समूह ने कश्मीरी पंडितों से तुलना कर ‘नस्ली सफाई' का जताया खतरा

मणिपुर संघर्ष: मेइती समूह ने कश्मीरी पंडितों से तुलना कर ‘नस्ली सफाई’ का जताया खतरा
Modified Date: May 18, 2023 / 09:01 pm IST
Published Date: May 18, 2023 9:01 pm IST

नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) मणिपुर में जारी तनाव के बीच बहुसंख्यक मेइती समुदाय के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को अपनी अनिश्चित स्थिति की तुलना कश्मीरी पंडितों के साथ करते हुए कहा कि उन पर अपने ही राज्य में “नस्ली सफाई’ का खतरा है।

राष्ट्रीय राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ‘वर्ल्ड मेइती काउंसिल’ के सदस्यों केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस बात पर अफसोस जताया कि वे कई प्रयासों के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने में नाकाम रहे।

अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद पूर्वोत्तर राज्य में हिंसक झड़पें हुईं थीं।

आरक्षित वन भूमि से कुकी ग्रामीणों को बेदखल करने के बाद कई छोटे-छोटे आंदोलन हुए, जिसके बाद झड़पें हुईं।

नागरिक संस्था ‘वर्ल्ड मेइती काउंसिल’ के अध्यक्ष नबाश्याम हेग्रुजाम ने कहा, “मणिपुर में जो घटनाएं हुईं, वे पूर्व नियोजित थीं। हम सरकार को चेताते रहे कि ऐसा कुछ हो सकता है… हम आज वैसी स्थिति में हैं, जैसी कश्मीरी पंडितों ने झेली।”

उन्होंने दावा किया, “हमें अपने ही राज्य में नस्ली सफाई का खतरा है।”

हेग्रुजाम ने यह भी कहा कि वे एक साल से अधिक समय से शाह के साथ एक बैठक की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक मिलने का समय नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा, “मेइती और नगा मणिपुर के मूल निवासी हैं…हम गृह मंत्री के सामने अपना नजरिया रखना चाहते हैं। हमनें उसने बात करने के कई प्रयास किए…पांच मिनट के लिये ही सही। हमने अपना आवेदन दिया, लेकिन हम बहुत आहत हैं कि संकट के इस समय में भी गृह मंत्री के पास हमारे लिये समय नहीं है।”

मणिपुर में मेइती समुदाय की आबादी लगभग 53 प्रतिशत है और ये ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय समुदायों नगा और कुकी समेत अन्य की आबादी करीब 40 प्रतिशत है और वे पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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