मणिपुर मुठभेड़ मामला: अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर 6 माह में निर्णय का अदालत को निर्देश

मणिपुर मुठभेड़ मामला: अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर 6 माह में निर्णय का अदालत को निर्देश

मणिपुर मुठभेड़ मामला: अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर 6 माह में निर्णय का अदालत को निर्देश
Modified Date: November 29, 2022 / 07:46 pm IST
Published Date: October 20, 2022 9:47 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में 2000 से 2012 तक कथित मुठभेड़ में शामिल सुरक्षा बलों के खिलाफ अभियोग की मंजूरी के मुद्दे पर छह माह के भीतर निर्णय करने का उच्च न्यायालय को बृहस्पतिवार को निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने इस बीच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को कुछ अतिरिक्त कार्य सौंपने की अनुमति दे दी।

न्यायालय ने यह निर्णय तब लिया जब उसे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने अवगत कराया कि कथित न्यायेतर मुठभेड़ मामले में एसआईटी की जांच का कार्य पूरा हो गया है।

भाटी ने बताया कि समय-समय पर इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जा रही थी और एसआईटी द्वारा जांच किये जा रहे 39 मामलों में से 19 में आरोप-पत्र दाखिल किये जा चुके हैं, जबकि 18 में क्लोजर रिपोर्ट लगायी गयी है।

एएसजी ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए एसआईटी के सदस्यों को कुछ अतिरिक्त कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस और मनेका गुरुस्वामी ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया कि सभी मामलों की जांच पूरी हो गयी है।

दोनों अधिवक्ताओं ने दलील दी कि एसआईटी ने जो जांच की है वह ‘केवल एक हिस्सा है, जबकि शेष हिस्सा अब भी अधूरा है।’

सुनवाई के शुरू में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह इस मामले में सुनवाई पूरी करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे। इसके बाद उन्होंने इस मामले को दूसरी पीठ के समक्ष 15 नवम्बर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ललित आठ नवम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

भाषा

सुरेश माधव

माधव


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