मणिपुर हिंसा: न्यायालय ने सीबीआई और एसआईटी को पीड़ितों को आरोपपत्र की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया

मणिपुर हिंसा: न्यायालय ने सीबीआई और एसआईटी को पीड़ितों को आरोपपत्र की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया

मणिपुर हिंसा: न्यायालय ने सीबीआई और एसआईटी को पीड़ितों को आरोपपत्र की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया
Modified Date: February 26, 2026 / 08:08 pm IST
Published Date: February 26, 2026 8:08 pm IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) मणिपुर में वर्ष 2023 की जातीय हिंसा के मामलों में उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को नए निर्देश जारी करते हुए सीबीआई और मणिपुर के विशेष जांच दलों (एसआईटी) से कहा कि वे अपनी ओर से दायर किए गए आरोपपत्रों की प्रतियां पीड़ितों और उनके परिवारों को उपलब्ध करायें।

ये निर्देश उच्चतम न्यायालय द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पदसालगीकर की ओर से दायर 12वीं स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद जारी किए गए। पदसालगीकर को मणिपुर में आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था।

पदसालगीकर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने विशेष अदालत में 20 हिंसा मामलों में आरोपपत्र दायर किए हैं और छह अन्य प्राथमिकी की जांच जारी है जो अगले छह महीनों में पूरी हो जाएगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सीबीआई को यह सुनिश्चित करने को कहा कि शेष हिंसा मामलों की जांच निर्धारित समय के भीतर पूरी हो और आरोपपत्र दायर किए जाएं।

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर द्वारा पीड़ितों और उनके परिवारों को मामलों की प्रगति के बारे में कोई जानकारी न होने की जोरदार दलीलों पर ध्यान देते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने सीबीआई और राज्य पुलिस की विभिन्न एसआईटी को प्रभावित व्यक्तियों के साथ आरोपपत्रों की प्रतियां साझा करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘मणिपुर राज्य विधि सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) और असम राज्य विधि सेवा प्राधिकरण को प्रत्येक पीड़ित को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया जाता है।’’ पीठ ने कहा कि इसके साथ यह भी कहा कि ऐसे वकीलों को स्थानीय भाषा में निपुण होना चाहिए ताकि पीड़ित और उनके परिवार उनसे संवाद कर सकें।

इसके अलावा, पीठ ने केंद्र सरकार को पदसालगीकर को उनकी सेवाओं के लिए तत्काल 10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि वह पैनल के सदस्यों और पूर्व डीजीपी को उनकी सहायता के लिए मानदेय बाद में तय करेगी।

मणिपुर में तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद 200 से अधिक लोग मारे गए, सैकड़ों व्यक्ति घायल हुए और हजारों लोग विस्थापित हुए। यह हिंसा तब शुरू हुई जब पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की ओर से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने को लेकर की जा रही मांग के विरोध में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था।

भाषा संतोष रंजन

रंजन


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