रांची, छह फरवरी (भाषा) झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जनता दल (यूनाइटेड) विधायक सरयू राय के उस सोशल मीडिया पोस्ट की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है जिसमें दावा किया गया है कि राज्य के खजाने से 10,000 करोड़ रुपये गायब हो गए हैं।
राय ने बुधवार को एक पोस्ट में दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के कार्यकाल में एक ऑडिट के दौरान गायब राशि का पता चला था, जिसके बाद सभी विभागीय सचिवों की एक बैठक बुलाई गई थी। राय ने आरोप लगाया कि सचिवों द्वारा दी गई व्याख्याएं भी अस्पष्ट थीं।
सत्तारुढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत गठबंधन की घटक कांग्रेस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताएं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकाल से संबंधित हैं।
जद(यू) विधायक की पोस्ट में दावा किया गया कि वर्तमान वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने पिछले साल इस मुद्दे पर विभागीय सचिवों की बैठक के लिए कहा था लेकिन उनका पत्र मुख्य सचिव को भेज दिया गया था और तब से लंबित है।
विपक्ष के नेता मरांडी ने एक बयान में कहा, ‘‘वित्त सचिव ने मंत्री के आदेशों का पालन करने के बजाय फाइल को मुख्य सचिव के पास भेज दिया और यह पिछले तीन महीनों से लंबित है। सरकार जांच से क्यों कतरा रही है?’’
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने इस बात की जांच की मांग की कि पैसा कहां गया और क्या इससे किसी वरिष्ठ अधिकारी या मुख्यमंत्री को फायदा हुआ।
कांग्रेस की झारखंड इकाई के प्रवक्ता सोनल शांति ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा के एक दशक से अधिक समय से सत्ता में रहने के बावजूद, राज्य के खजाने का वर्षों से ऑडिट नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि जब पिछली झामुमो-कांग्रेस-राजद सरकार के दौरान ऑडिट की प्रक्रिया शुरू हुई तो भाजपा के शासनकाल की अनियमितताएं सामने आने लगीं।
शांति ने एक बयान में कहा, ‘‘मौजूदा सरकार वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ा नियंत्रण रखती है। वित्त मंत्रालय ने सभी बोर्ड, निगमों और आयोगों का संपूर्ण ऑडिट कराने का भी निर्णय लिया है। ऑडिट के नतीजे आने पर भाजपा के दागदार शासन का पर्दाफाश हो जाएगा।’’
उन्होंने दावा किया कि कथित 10,000 करोड़ रुपये की अनियमितता प्रथम दृष्टया भाजपा के शासनकाल में हुई प्रतीत होती है।
भाषा आशीष नरेश
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