हज अधिकारियों के चयन में अंक देने की व्यवस्था तय नहीं थी : सीआईसी को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने बताया
हज अधिकारियों के चयन में अंक देने की व्यवस्था तय नहीं थी : सीआईसी को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने बताया
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि हज 2025 के लिए हज अधिकारियों और हज अधीक्षक के चयन में अंक देने की कोई व्यवस्था निर्धारित या कायम नहीं की गई थी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि साक्षात्कार की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
मंत्रालय की ओर से सुनवाई के दौरान दिए गए इन बयानों के बाद सूचना आयुक्त संजीव कुमार जिंदल ने केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को निर्देश दिया कि वह इन तथ्यों को लिखित रूप में आवेदक के सामने स्पष्ट करे।
सीआईसी ने यह भी पाया कि सीपीआईओ द्वारा सूचना देने से यह कहते हुए स्पष्ट रूप से इनकार करना कानूनी रूप से अस्वीकार्य और अनुचित है। सीपीआईएफओ ने सूचना देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि ऐसा करना संसाधनों का असंतुलित उपयोग होगा
यह मामला एक आरटीआई आवेदक की अपील के बाद सीआईसी के समक्ष आया था। आवेदक ने हज अधिकारी और हज अधीक्षक पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का विवरण, उनके संबंधित विभाग, साक्षात्कार की तारीखें, चयन की स्थिति और चयन न होने के कारण मांगे थे।
आवेदक ने साक्षात्कार लेने वाले अधिकारियों का विवरण, प्रत्येक उम्मीदवार को दिए गए अंक तथा तीन फरवरी, 2025 को भारत वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित इंटरव्यू की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मांगी थी।
सीपीआईओ ने पहले कहा था कि आरटीआई आवेदन के पहले बिंदु में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के लिए संसाधनों का अत्यधिक इस्तेमाल करना पड़ेगा, जिसकी आरटीआई अधिनियम के तहत अनुमति नहीं है।
मार्किंग शीट से संबंधित अनुरोध पर सीपीआईओ ने कहा था कि उम्मीदवारों की मार्किंग शीट बौद्धिक संपदा है और आरटीआई अधिनियम के तहत उसे सूचना देने से छूट प्राप्त है। साथ ही, उसने कहा था कि साक्षात्कार की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है।
सीआईसी की सुनवाई के दौरान सीपीआईओ ने बताया कि मांगी गई जानकारी किसी एक संकलित रूप में उपलब्ध नहीं थी।
हालांकि, सीपीआईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि “चयन के लिए कोई अंक प्रणाली निर्धारित या कायम नहीं की गई थी” और “साक्षात्कार की कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।”
सीपीआईओ ने पहले भी आरटीआई अधिनियम की धारा 7(9) का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार किया था और कहा था कि ऐसा करने में संसाधनों का अनुचित इस्तेमाल होगा।
सीआईसी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धारा 7(9) के तहत पूरी सूचना से इनकार करना “कानूनी रूप से अस्थिर और अस्वीकार्य” है।
आयोग ने कहा कि भले ही मांगी गई सूचना किसी संकलित प्रारूप में उपलब्ध नहीं हो, फिर भी सीपीआईओ का “वैधानिक दायित्व है कि वह अपने पास उपलब्ध सूचना के संबंध में उचित जवाब दे।”
सीआईसी ने सीपीआईओ को आरटीआई आवेदन की दोबारा जांच करने और आवेदक को प्रत्येक बिंदु पर तथ्यात्मक जवाब उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।
भाषा रंजन माधव
माधव

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