मास्टर प्लान में अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास, झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए आवास का प्रस्ताव

मास्टर प्लान में अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास, झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए आवास का प्रस्ताव

मास्टर प्लान में अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास, झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए आवास का प्रस्ताव
Modified Date: August 20, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: August 20, 2026 5:51 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) दिल्ली के नए मास्टर प्लान-2047 में अनधिकृत कॉलोनियों के क्षेत्र-आधारित पुनर्विकास का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में सड़कों, खुले स्थानों और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आसपास की बस्तियों को एक साथ विकसित किया जा सकेगा।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बृहस्पतिवार को इस योजना को अधिसूचित किया। इसमें पात्र अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए एक रूपरेखा दी गई है, जो मौजूदा नियमितीकरण प्रक्रिया के साथ-साथ चलेगी।

इस रूपरेखा के तहत पुनर्विकास योजना किसी डेवलपर, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) या कॉलोनी अथवा कॉलोनियों के समूह के किसी हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकृत समूह द्वारा प्रस्तावित की जा सकेगी। ऐसी योजना के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल 2,000 वर्ग मीटर होगा।

आसपास की कॉलोनियों या उनके कुछ हिस्सों को एकीकृत पुनर्विकास के लिए आपस में जोड़ा जा सकेगा।

वहीं, ‘ग्रुप हाउसिंग’ के लिए अलग-अलग भूखंडों को भी मिलाया जा सकेगा।

योजना के अनुसार, अधिसूचित अनधिकृत कॉलोनी के बाहर की आसपास की जमीन को भी उसके मालिकों की सहमति से योजना में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, ऐसी अतिरिक्त जमीन संबंधित कॉलोनी के चिन्हित क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

योजना में सड़क से जुड़ाव के लिए भी नियम तय किए गए हैं।

पुनर्विकास वाले क्षेत्र का कम से कम नौ मीटर चौड़ी सड़क से सीधा जुड़ाव होना जरूरी होगा। जहां ऐसी सड़क उपलब्ध नहीं है, वहां जमीन मालिकों को इसके लिए जरूरी जमीन उपलब्ध करानी होगी।

नई सड़क को कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सड़क से जोड़ना होगा। पुनर्विकास योजनाओं में अधिकतम 350 का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) अनुमत होगा। साथ ही, इनमें सार्वजनिक स्थानों और स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, पुलिस चौकी तथा बाल देखभाल केंद्र जैसी सुविधाओं के लिए भी जगह उपलब्ध करानी होगी।

मास्टर प्लान के अनुसार, दिल्ली की करीब 85 प्रतिशत आबादी निम्न और मध्यम आय वर्ग से आती है।

मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि 2047 तक शहर को करीब 40 लाख अतिरिक्त आवासीय इकाइयों की जरूरत होगी।

झुग्गी और झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) बस्तियों के लिए योजना में तीन विकल्प दिए गए हैं, उसी स्थान पर मकानों का पुनर्निर्माण, लोगों को दूसरी जगह बसाना या मौजूदा क्षेत्र में सुधार करना।

योजना के ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ सिद्धांत के तहत पात्र निवासियों को जहां संभव हो, उनकी मौजूदा बस्तियों में ही सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

यानी, अगर किसी बस्ती का उसी स्थान पर पुनर्विकास किया जा सकता है, तो नए मकान मिलने से पहले वहां के निवासियों को किसी दूसरी जगह नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि, यह विकल्प पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जमीन, यमुना के बाढ़ क्षेत्र, जलाशयों, नालों, रेलवे के सुरक्षा क्षेत्र, सड़कों के लिए निर्धारित जमीन या चिन्हित सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन पर स्थित जेजे बस्तियों पर लागू नहीं होगा।

अन्य स्थानों पर पात्र परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत विकसित किया जाएगा।

योजना में इसके लिए न्यूनतम 2,000 वर्ग मीटर के भूखंड की जरूरत होगी।

पुनर्वास और डेवलपर को आर्थिक लाभ देने वाले हिस्सों के लिए अधिकतम 500 का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) रखा गया है।

योजना में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

ऐसे क्षेत्रों की बस्तियां मुआवजे या पुनर्वास के लिए पात्र नहीं होंगी। योजना में अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए चिन्हित क्षेत्रों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आवास उपलब्ध कराने की अनिवार्यता से भी छूट दी गई है।

‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ के तहत ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रमुख सड़कों के किनारे पेड़, मिट्टी के टीले और तटबंध बनाकर हरित पट्टियां विकसित करने जैसे उपाय किए जाएंगे।

दीर्घकालिक रणनीति में शोर कम करने के लिए सड़कों और फुटपाथों के डिजाइन तथा उनकी सतह में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में बदलाव का भी प्रस्ताव है।

इसके अलावा, राजधानी में पर्यावरण की दृष्टि से दबाव वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।

ये उपाय एमपीडी-2047 में बताई गई पर्यावरण संबंधी रणनीतियों का हिस्सा हैं।

योजना में दिल्ली को ‘‘हरित, जलवायु के अनुकूल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी राजधानी’’ बनाने की परिकल्पना की गई है, जहां लोगों को बेहतर जीवन-यापन की सुविधाएं और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हो।

इस रणनीति के तहत दिल्ली सरकार द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक कार्ययोजना तैयार कर लागू की जाएगी।

इसे समय-समय पर सरकार द्वारा जारी अन्य दिशा-निर्देशों के अनुरूप भी तैयार किया जा सकता है।

इसके अलावा ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में यमुना में गिरने वाले सभी 22 नालों के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट, कृत्रिम आर्द्रभूमि (कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड्स) और जैव-उपचार (बायो-रिमेडिएशन) के जरिए रोककर उसे उपचारित करने की योजना है।

यह यमुना और उसके बाढ़ क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए प्रस्तावित कई उपायों में शामिल है।

इस योजना में नालों के रोके गए मार्गों को बहाल करने और उन्हें हरित क्षेत्रों तथा बाढ़ क्षेत्र से इस तरह जोड़ने का भी प्रस्ताव है कि लगातार पारिस्थितिक गलियारे विकसित किए जा सकें।

योजना में यमुना और अन्य जलाशयों में बिना उपचारित सीवेज, गंदे पानी, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के बहाव पर सख्त रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।

ये उपाय ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में शामिल ‘‘यमुना नदी और उसके बाढ़ क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए विशेष पहल’’ का हिस्सा हैं।

योजना के मुताबिक, दिल्ली एक नदी से जुड़ा शहर है और इसका इतिहास व सांस्कृतिक स्वरूप यमुना तथा उसके बाढ़ क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश


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