‘मातृभूमि’ अखबार ने केरल के प्राचीन मूल्यों पर केंद्रित ओणम अभियान शुरू किया

‘मातृभूमि’ अखबार ने केरल के प्राचीन मूल्यों पर केंद्रित ओणम अभियान शुरू किया

‘मातृभूमि’ अखबार ने केरल के प्राचीन मूल्यों पर केंद्रित ओणम अभियान शुरू किया
Modified Date: August 21, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: August 21, 2026 5:01 pm IST

कोच्चि, 21 अगस्त (भाषा) प्रमुख मलयालम अखबार मातृभूमि ने ओणम के मूल्यों और अपने काम के जरिए इन्हें आगे बढ़ाने वाले लोगों पर केंद्रित एक अभियान शुरू किया है।

कंपनी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस अभियान का नाम ‘मनास्सिल एन्नुम मावेली’ (मावेली की भावना हमेशा जीवित है) है, जो इस बात पर केंद्रित है कि ‘मावेली नाडु वानीदुम कालम’ (वह समय जब राजा महाबली का आदर्श राज्य फूला-फला) में परिकल्पित केरलम समय के साथ कैसे बदला और इसके मूल्य आज भी राज्य के लोगों के जीवन और कार्यों में किस तरह दिखाई देते हैं।

अभियान में मीनाक्षी अम्मा को शामिल किया गया है, जिन्होंने दशकों से पारंपरिक मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू को संरक्षित करने में योगदान दिया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण के लिए जानी जाने वाली कोलाकिल देवकी अम्मा, पारंपरिक औषधीय उपचार को संरक्षित करने और उसका अभ्यास करने वाली लक्ष्मीकुट्टी भी अभियान का हिस्सा हैं। ये सभी पद्मश्री से सम्मानित हैं।

वहीं, केरल के भविष्य के लिए समाधान विकसित करने के वास्ते तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले देवन और देविका चंद्रशेखर भी अभियान का हिस्सा हैं।

अभियान में इनके काम और उसके प्रभाव पर ध्यान दिया गया है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाना, पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना, पारंपरिक प्रथाओं को संरक्षित करना तथा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का इस्तेमाल करना शामिल है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, अभियान की परिकल्पना मैत्री ने की है और इसे फिल्म, प्रिंट, रेडियो तथा डिजिटल मंचों पर चलाया जाएगा। फिल्मों में अभियान में शामिल लोगों के काम और उनके सफर पर ध्यान दिया गया है, जबकि प्रिंट और रेडियो के जरिए अभियान के मूल विचार को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

अभियान के बारे में मातृभूमि के प्रबंध निदेशक एम वी श्रेयम्स कुमार ने कहा, ‘‘एक समाचार पत्र के तौर पर हमारी जिम्मेदारी केवल दुनिया को जैसी है, वैसी ही बताना नहीं है, बल्कि उन लोगों को पहचानना भी है जो दुनिया को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। इस अभियान के जरिए हम उन लोगों का सम्मान करना चाहते है जिन्होंने ज्ञान, कला और नवाचार के जरिए केरल को आकार दिया है। हम उनके योगदान और विरासत को सामने लाना चाहते थे।’’

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में