Mayawati Replied Rahul Gandhi: ‘कांग्रेस ने डॉ अम्बेडकर का सम्मान नहीं किया, वह कांशीराम का कैसे करेंगे?’.. मायावती का राहुल गांधी को तीखा पलटवार, खुद पढ़ें..
Mayawati Replied Rahul Gandhi: राहुल गांधी के कांशीराम बयान पर मायावती का तीखा पलटवार, कांग्रेस पर अंबेडकर के अपमान और दलित विरोधी सोच का आरोप।
Mayawati Replied Rahul Gandhi || Image- Britannica file
- राहुल गांधी के बयान पर मायावती का पलटवार
- कांग्रेस पर अंबेडकर का अपमान करने का आरोप
- कांशीराम जयंती पर बसपा कार्यकर्ताओं को संदेश
Mayawati Replied Rahul Gandhi: नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को बड़ा बयान देते हुए कहा था कि यदि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जीवित होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। उन्होंने कांशीराम और बसपा के उभरने के लिए कांग्रेस की चूक का जिक्र किया था। हालांकि राहुल गांधी के इस बयान पर अब यूपी की पूर्व सीएम और बसपा की सुप्रीमो बहन मायावती ने राहुल को जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि जिस कांग्रेस ने कभी डॉ. भीमराव आंबेडकर को सम्मान नहीं दिया, वह कांशीराम का क्या सम्मान करेगी?
क्या लिखा मायावती ने?
मायावती ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर राहुल गांधी को लताड़ लगाते हुए लिखा, “जैसा कि सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने काफी वर्षों तक केंद्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा व भारतीय संविधान के मूल निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का कभी भी आदर-सम्मान नहीं किया और न ही उनको ‘भारतरत्न’ की उपाधि से भी सम्मानित किया। भला फिर यह पार्टी अब मान्यवर श्री कांशीराम जी को कैसे इस उपाधि से सम्मानित कर सकती है?”
मायावती ने आगे बताया कि, “इसी कांग्रेस पार्टी ने केंद्र में अपनी सत्ता के रहते हुए इनके (मान्यवर श्री कांशीराम जी के) देहांत होने पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया तथा न ही उस समय यूपी की सपा सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित किया। इसी प्रकार दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर दलित समाज के बने अनेक संगठन व पार्टियां आदि भी इनके नाम को भुनाने की कोशिश में हमेशा लगी रहती हैं।”
‘कांग्रेस पार्टी से सजग रहें जनता’ : मायावती
Mayawati Replied Rahul Gandhi: बसपा चीफ ने आगे लिखा कि, “अब ये सभी पार्टियां आएदिन किस्म-किस्म के हथकंडे इस्तेमाल करके मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा बनाई गई पार्टी बीएसपी को कमजोर करने में लगी हैं। अतः इनके अनुयायी व समर्थक हमेशा इनसे सचेत रहें। खासकर कांग्रेस पार्टी से जरूर सजग रहें, जिसकी दलित-विरोधी सोच व मानसिकता होने की वजह से ही बीएसपी बनानी पड़ी है। साथ ही, कल दिनांक 15 मार्च 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर, इनके द्वारा निर्मित पार्टी बीएसपी के सभी कार्यक्रमों को उ.प्र. सहित पूरे देश में पार्टी के लोग जरूर कामयाब बनाएं, यही अपील।”
1. जैसा कि सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने काफी वर्षो तक केन्द्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा व भारतीय संविधान के मूल निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कभी भी आदर-सम्मान नहीं किया और ना ही उनको ’भारतरत्न’ की उपाधि से भी सम्मानित किया। भला फिर यह पार्टी…
— Mayawati (@Mayawati) March 14, 2026
क्या कहा था राहुल गांधी ने?
दरअसल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया था कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपना काम ठीक से किया होता तो कांशीराम कभी सफल नहीं होते।
राहुल ने कहा, “संविधान कहता है कि यह देश सबका है और सभी लोग समान हैं, लेकिन आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है और फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है।”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर और कांशीराम तथा सावरकर के बीच एक बड़ा अंतर है। उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, “गांधी (महात्मा गांधी) जी 10-15 साल जेल में रहे, लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया। बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन समझौता नहीं किया। कांशीराम ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया क्योंकि वह ऐसा कर ही नहीं सकते थे।”
कौन थे दलितों के मसीहा कांशीराम?
Mayawati Replied Rahul Gandhi: कांशीराम भारत के प्रमुख दलित नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को संगठित कर उन्हें राजनीतिक शक्ति दिलाने के लिए महत्वपूर्ण काम किया। उनका जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रोपड़ (अब रूपनगर) में एक रामदासिया सिख परिवार में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की, लेकिन नौकरी के दौरान जातिगत भेदभाव के अनुभवों ने उन्हें सामाजिक आंदोलन की ओर प्रेरित किया।
दलित और पिछड़े समाज को संगठित करने के लिए कांशीराम ने कई संगठन बनाए। उन्होंने 1978 में BAMCEF की स्थापना की, जो सरकारी कर्मचारियों में बहुजन चेतना फैलाने के लिए बनाया गया था। इसके बाद 1981 में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (DS4) बनाई और 1984 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य बहुजन समाज को राजनीतिक सत्ता में भागीदारी दिलाना था। उनका प्रसिद्ध नारा था, “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।”
कांशीराम के विचारों पर डॉ. बी. आर. आंबेडकर का गहरा प्रभाव था। उन्होंने मायावती को राजनीति में आगे बढ़ाया और उनके मार्गदर्शन में मायावती कई बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। कांशीराम का निधन 9 अक्टूबर 2006 को नई दिल्ली में हुआ। उन्हें दलित राजनीति को संगठित करने वाले सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है।
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