जन विश्वास अधिनियम के तहत डिजिटल चालान की योजना बना रही एमसी़डी
जन विश्वास अधिनियम के तहत डिजिटल चालान की योजना बना रही एमसी़डी
(मानसी जगानी)
नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जन विश्वास अधिनियम, 2026 के तहत नागरिक नियमों के उल्लंघनों पर जुर्माना जारी करने और वसूलने के लिए एक डिजिटल तंत्र विकसित करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित तंत्र के तहत ‘एमसीडी 311’ ऐप में भी बदलाव किए जा सकते हैं और इसके साथ ही एक समर्पित बैकएंड पोर्टल भी बनाया जा सकता है, जिसके माध्यम से फील्ड अधिकारी निरीक्षण के बाद मौके पर ही जुर्माना जारी कर सकेंगे और साक्ष्य को डिजिटल रूप से अपलोड कर सकेंगे।
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मंगलवार को इस बात पर चर्चा हुई कि इसे कैसे लागू किया जाए। हम मौके पर अधिकारी द्वारा चालान करने के बजाय डिजिटल कार्यप्रणाली, नोटिस जारी करने का डिजिटल तरीका, धन संग्रह का डिजिटल तरीका और नोटिस की तामील का डिजिटल तरीका अपनाने पर विचार कर रहे हैं।”
नई प्रणाली के तहत, फील्ड स्तर के अधिकारियों को दिल्ली नगर निगम (डीएमसी) अधिनियम, 1957 के तहत उल्लंघनों के लिए मौके पर निरीक्षण करने और नागरिक जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।
उन्होंने बताया, !!अगर कोई भुगतान नहीं करता है, तो उसे न्याय अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। कर बकाया के रूप में राशि वसूलने का भी प्रावधान है।”
अधिकारी ने साथ ही यह भी बताया कि कुछ मामलों में वसूली के लिए संपत्तियों को भी कुर्क किया जा सकता है।
यह डिजिटल पहल जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद शुरू की गई है, जो निगम क्षेत्रों में होने वाले कई छोटे-छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और आपराधिक मुकदमे की जगह जुर्माना वसूलने का प्रावधान करता है।
एमसीडी ने हाल ही में जारी एक कार्यालय आदेश में पशु चिकित्सा सेवा, स्वास्थ्य, लाइसेंसिंग, डीईएम, इंजीनियरिंग, विज्ञापन और कारखाना लाइसेंसिंग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को चालान करने के लिए न्याय प्राधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया है।
उपायुक्तों और वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को ऐसे आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि पहले पर्याप्त कर्मचारियों और संसाधनों की कमी और साथ ही उल्लंघन के लिए जुर्माना भी बहुत कम था।
उदाहरण के लिए, सार्वजनिक स्थानों पर बिना पट्टा बांधे कुत्ते घुमाने पर पहले केवल 50 रुपये का जुर्माना था।
एक अधिकारी ने बताया, “क्योंकि जुर्माना इतना कम था इसलिए किसी को परवाह नहीं थी। वैसे भी, कौन यह जांच करेगा कि कोई कुत्ते को पट्टा बांधकर घुमा रहा है या बिना पट्टा बांधे?”
उन्होंने बताया कि पूरी तरह से जमीनी स्तर पर मौजूद रहकर दंडित करना भी मुश्किल था।
अधिकारी ने बताया, “ चूंकि सब कुछ एक अधिकारी को ही करना होता था इसलिए हर व्यक्ति पर जुर्माना लगाना संभव नहीं था। लेकिन अगर यह पूरी तरह से डिजिटल हो जाता है, तो अनुवर्ती कार्रवाई और प्रवर्तन आसान हो जाएगा।”
संशोधित नियमों के तहत न्याय अधिकारियों को व्यक्तियों को तलब करने, साक्ष्यों की जांच करने और दंड लगाने का अधिकार होगा।
आदेशों के विरुद्ध अपील 30 दिनों के भीतर दायर की जा सकती है जबकि अपीलीय अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करना होगा।
अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था 15 मई को अधिसूचित की गई थी और नगर निकाय वर्तमान में इसके कार्यान्वयन के लिए संचालन में स्पष्टता और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर काम कर रहा है।
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन
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