दुर्घटना पीड़ित के केवल शराब सेवन से ‘सह लापरवाही’ साबित नहीं होती: न्यायाधिकरण

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दुर्घटना पीड़ित के केवल शराब सेवन से ‘सह लापरवाही’ साबित नहीं होती: न्यायाधिकरण

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 05:33 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 05:33 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने कहा है कि सड़क दुर्घटना के पीड़ित द्वारा शराब का मात्र सेवन करना अपने आप में सह-लापरवाही स्थापित नहीं करता।

न्यायाधिकरण ने 2018 में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए व्यक्ति को 30.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी शिरीश अग्रवाल ने 21 वर्षीय सचिन धवन की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने बताया कि 5 जुलाई 2018 को वह पूसा गेट के पास मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी एक ट्रक ने उसे टक्कर मार दी और कुछ दूरी तक घसीटते हुए ले गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि दुर्घटना में उसे गंभीर चोटें आईं और उसके बाएं निचले पैर में 40 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हो गई।

छह जून के आदेश में न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की मेडिकल-लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) से पता चलता है कि उसकी सांस में शराब की गंध थी। हालांकि, दुर्घटना के समय उसके द्वारा ली गई शराब की मात्रा रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि वह अनुमेय सीमा से अधिक शराब के प्रभाव में वाहन चला रहा था।’’

न्यायाधिकरण ने कहा कि केवल शराब का सेवन करना, चाहे वह सीमा के भीतर हो या उससे अधिक, किसी अन्य व्यक्ति को यह अधिकार नहीं देता कि वह लापरवाही से वाहन चलाकर उसे टक्कर मार दे।

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘पीड़ित द्वारा शराब का मात्र सेवन करना अपने आप में सह-लापरवाही स्थापित नहीं करता।’’

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि लिखित बयान में बिना किसी सबूत के लगाए गए आरोपों के अलावा रिकार्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता नशे में लापरवाही से वाहन चला रहा था या उसने हेलमेट नहीं पहना था।

न्यायाधिकरण ने कहा कि ट्रक चालक सबसे महत्वपूर्ण गवाह था, जिसे अपने बचाव में पेश होकर बयान देना चाहिए था, लेकिन वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ।

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि हेलमेट न पहनना कानून का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन यह अपने आप में सह-लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता।

साथ ही न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि उस समय याचिकाकर्ता के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, फिर भी उसके खिलाफ सह-लापरवाही नहीं ठहराई जा सकती।

साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधिकरण ने कहा कि यह सिद्ध होता है कि दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई।

न्यायाधिकरण ने ट्रक मालिक और चालक को 30.77 लाख रुपये के मुआवजे का ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया।

भाषा अमित नरेश

नरेश