असम के साथ मिजोरम की सीमा 1875 की अधिसूचना पर आधारित है: सपडांगा
असम के साथ मिजोरम की सीमा 1875 की अधिसूचना पर आधारित है: सपडांगा
आइजोल, 27 अगस्त (भाषा) मिजोरम के गृह मंत्री के सपडांगा ने बुधवार को सरकार के इस रुख की पुष्टि की कि असम के साथ उसकी सीमा 1875 में जारी अधिसूचना पर आधारित है।
मिजोरम-असम सीमा पर तनाव के कुछ दिन बाद यह बयान सामने आया है।
मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा को संबोधित करते हुए सपडांगा ने कहा कि मिजोरम सरकार ने ‘कछार जिले की दक्षिणी सीमा पर आंतरिक रेखा’ में सीमांकित क्षेत्रों को मंजूरी दे दी है, जिसे 20 अगस्त, 1875 को असम के साथ राज्य की वास्तविक सीमा के रूप में अधिसूचित किया गया था।
असम सरकार का हालांकि कहना है कि 1933 में भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा तैयार किये गए मानचित्र द्वारा परिभाषित सीमा ही मिजोरम के साथ उसकी संवैधानिक सीमा है।
गृह मंत्री के अनुसार, मिजोरम और असम दोनों ने 1988 से लेकर अब तक 10 से अधिक मौकों पर सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए बातचीत की है।
उन्होंने कहा कि सीमा मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच आधिकारिक स्तर की अंतिम चर्चा 25 अप्रैल को गुवाहाटी में हुई थी, ताकि लंबे समय से जारी विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
सपडांगा ने कहा कि अगले दौर की अधिकारी स्तरीय वार्ता मिजोरम में प्रस्तावित है, लेकिन इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय वार्ता के अलावा दोनों राज्य एक-दूसरे को सीमा संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराकर विवाद को सुलझाने के लिए कदम उठा रहे हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि मिजोरम सरकार ने राज्य के दावे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र करने हेतु एक अध्ययन दल का गठन किया है।
सपडांगा ने कहा कि राज्य सरकार ने असम के साथ राज्य की सीमा पर सीमा सड़कों का निर्माण और रखरखाव किया है।
मिजोरम के तीन जिलों- आइजोल, कोलासिब तथा मामित- असम के कछार, श्रीभूमि और हैलाकांडी जिलों के साथ 164.6 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं।
भाषा देवेंद्र नरेश
नरेश

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