मोदी ने प्रौद्योगिकी, खनिजों को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर चेताया

मोदी ने प्रौद्योगिकी, खनिजों को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर चेताया

मोदी ने प्रौद्योगिकी, खनिजों को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर चेताया
Modified Date: September 13, 2026 / 02:39 pm IST
Published Date: September 13, 2026 2:39 pm IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का दुनियाभर में आम लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने तथा मानवता के हित में आगे बढ़ने के लिए ब्रिक्स देशों को सहयोग और समावेशी विकास के माध्यम से मजबूत होकर उभरना होगा।

भारत द्वारा आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘‘प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने’’ को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आगाह किया कि इससे साझा प्रगति और समृद्धि की राह में बाधा आ सकती है।

मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के विकासशील देशों का ब्रिक्स पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि इस मंच पर उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है और उनके लिए समाधान थोपे नहीं जाते, बल्कि उन्हें साझेदार बनाकर समाधान तैयार किए जाते हैं।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

लगभग 49.5 प्रतिशत वैश्विक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स का वार्षिक शिखर सम्मेलन लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला, स्टार्टअप और संक्रामक रोगों से निपटने सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अहम परिणामों के साथ संपन्न हुआ।

मोदी ने कहा, ‘‘हमारी परिस्थितियां और वास्तविकताएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन आपसी सहयोग के माध्यम से हम सभी मिलकर आगे बढ़ सकते हैं और मानवता के कल्याण के लिए काम कर सकते हैं। हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के हित में हो।’’

मोदी ने यह टिप्पणी ब्रिक्स समूह के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में की। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा विभाजित भू-राजनीतिक माहौल से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों की लचीलापन बढ़ाने की क्षमता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के एजेंडे को चार स्तंभों – लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित किया गया।

उन्होंने कहा कि इन चार स्तंभों के आधार पर भारत ने ब्रिक्स के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स के भीतर विकसित किए गए समाधानों का लाभ केवल इस समूह तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘ग्लोबल साउथ’ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने योग्य और सुलभ बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आप सभी के सहयोग और समर्थन से हम अपनी साझा सोच को ऐसे सहयोग में बदलने में सफल रहे हैं, जिसमें सभी पक्षों को लाभ हो।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आज दुनिया में संघर्ष और तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका आम लोगों के जीवन पर लगातार नकारात्मक तथा दूरगामी प्रभाव पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने दिखाया है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए, ब्रिक्स समूह के भीतर हमने लचीलापन मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है।’’

मोदी ने कहा कि चुनौतियों की समय रहते पहचान करना, उनके लिए तैयार रहना और तत्काल कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी दृष्टिकोण के तहत हमने संक्रामक रोगों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर सहमति बनाई है। आपदा प्रबंधन के लिए प्रारंभिक चेतावनी से जुड़े आंकड़ों को एकीकृत करने के दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।’’

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला सहयोग ढांचा आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि नवाचार के क्षेत्र में ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ सदस्य देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को एक-दूसरे से जोड़ेगा। नवाचार आधारित और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए भारत ने ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ का प्रस्ताव भी रखा है।

‘इनक्यूबेटर’ से मतलब ऐसे संस्थानों या संगठनों से है जो नए स्टार्टअप को शुरुआती दौर में मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, विशेषज्ञ सलाह, संसाधन और निवेश से जुड़ने में मदद करते हैं।

दुनिया के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि ‘‘तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना हमारी साझा प्रगति में बाधा डाल सकता है।’’ उन्होंने कहा कि इसलिए भारत ने तकनीक को अपनाने में समावेशिता पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब चीन की ओर से महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंधात्मक नीतियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों को साझा करने में उसकी अनिच्छा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित कृषि नेटवर्क किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। इस पहल के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ा जाएगा।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को लेकर भारत के दृष्टिकोण पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने समूह के विभिन्न मंचों के माध्यम से मित्रता, साझेदारी और सहयोग को आगे बढ़ाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे। हमने अपने उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को इसमें सक्रिय भागीदार बनाने का प्रयास किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘‘ब्रिक्स कनेक्ट’ के माध्यम से हमने कौशल विकास, रोजगार क्षमता, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया है। छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए हमने ब्रिक्स एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सहयोग पोर्टल की शुरुआत की है।’’

मोदी ने कहा कि ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ स्थापित किया गया है, ताकि सदस्य देशों के शहरों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों और अनुभवों को साझा किया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारा विश्वास रहा है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स के भीतर भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यही स्थिरता की नींव है। यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। इस दिशा में हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘स्मार्ट ग्रिड’ और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है। इससे स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।

भाषा गोला शोभना

शोभना


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