ब्रिक्स में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत प्रदर्शित करने का कदम ‘अविस्मरणीय’: विहिप

ब्रिक्स में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत प्रदर्शित करने का कदम 'अविस्मरणीय': विहिप

ब्रिक्स में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत प्रदर्शित करने का कदम ‘अविस्मरणीय’: विहिप
Modified Date: September 13, 2026 / 02:00 pm IST
Published Date: September 13, 2026 2:00 pm IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं के समक्ष भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कदम, वैश्विक भाईचारे और कल्याण को बढ़ावा देने के मामले में ‘‘अविस्मरणीय’’ रहेगा।

ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में शिरकत करने आए नेताओं का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम के आयोजन स्थल भारत मंडपम में शनिवार को स्वागत किया। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान शामिल थे। इन नेताओं ने तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवाईं।

यह मंदिर चार धाम तीर्थों में से एक है और मान्यता है कि भगवान राम ने यहां पूजा की थी।

सम्मेलन शुरू होने से पहले, शुक्रवार को पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने उन्हें ‘तिरुक्कुरल’ के रूसी अनुवाद की एक प्रति भेंट की। ‘तिरुक्कुरल’ कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तमिल कविताओं का एक शास्त्रीय संग्रह है।

संत तिरुवल्लुवर की सम्मानित रचनाओं में से एक ‘तिरुक्कुरल’ में कई विषयों पर ज्ञान की बातें शामिल हैं।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि भारत मंडपम में रामेश्वरम मंदिर की तस्वीर के सामने वैश्विक नेताओं का स्वागत करने का मोदी का फैसला भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है।

बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमें गर्व है अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जिन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में विश्व नेताओं का स्वागत हिंदुओं के चार धामों में से एक भगवान शिव को समर्पित रामेश्वरम के मंदिर की पृष्ठभूमि में किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ माननीय प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति पुतिन को विश्व प्रसिद्ध तमिल ग्रन्थ भेंट करने तथा बाद में सभी वैश्विक नेताओं को हमारे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, दक्षिण भारत स्थित महान तीर्थ की पृष्ठभूमि के दर्शन द्वारा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और भगवान भोलेनाथ के परोक्ष दर्शन कराने के लिए आपका साधुवाद। विश्व वंधुत्व और विश्व कल्याण के क्षेत्र में आपका यह प्रयास अविस्मरणीय रहेगा।’’

भाषा धीरज शोभना

शोभना


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