मेघालय में बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास संपन्न, उग्रवाद से निपटने और आपसी भरोसा बढ़ाने पर जोर

मेघालय में बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास संपन्न, उग्रवाद से निपटने और आपसी भरोसा बढ़ाने पर जोर

मेघालय में बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास संपन्न, उग्रवाद से निपटने और आपसी भरोसा बढ़ाने पर जोर
Modified Date: May 30, 2026 / 12:06 pm IST
Published Date: May 30, 2026 12:06 pm IST

(सुष्मिता गोस्वामी)

उमरोई (मेघालय), 30 मई (भाषा) मेघालय के उमरोई में पहले बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में 13 देशों की सेनाएं एक साथ शामिल हुईं। शनिवार को समाप्त हुए इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उग्रवाद-रोधी अभियानों में सहयोग बढ़ाना और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करना था।

अधिकारियों ने बताया कि दो सप्ताह तक चले इस अभ्यास में भारत, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमा, नेपाल, फिलीपीन, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के 400 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 20 महिलाएं भी शामिल थीं। सैनिकों ने हेलीकॉप्टरों से रस्सी के सहारे उतरने, मार्गों पर आईईडी (विस्फोटक उपकरण) की पहचान करने और चट्टानी दीवारों से नीचे उतरने जैसे अभ्यास किए।

इस अभ्यास के दौरान आधुनिक और विशेष तकनीकों को सैन्य अभियानों में शामिल करने तथा उनके प्रभाव को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं (टीटीपी) में समाहित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक ब्रिगेडियर मयूर शेकटकर ने कहा, ‘‘मेघालय के उमरोई के शांत वातावरण में ‘प्रगति’ एक विशाल अभ्यास था। इसमें रॉक क्राफ्ट, विशेष हेलीबोर्न ऑपरेशन और सामरिक परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न विशेष अभ्यास किए गए।’’

अभ्यास के निदेशक कर्नल संदीप पुनिया ने बताया कि ‘प्रगति’ का अर्थ है ‘पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशन रीजन’।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य मित्र देशों के बीच समन्वय, परस्पर संचालन क्षमता और आपसी विश्वास को बढ़ाना है। पिछले दो सप्ताह तक हमने साथ प्रशिक्षण लिया, जिसमें अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में उग्रवाद-रोधी अभियानों पर विशेष ध्यान दिया गया।”

ब्रिगेडियर शेकटकर ने कहा कि इस अभ्यास ने भाग लेने वाले देशों के बीच मित्रता और सौहार्द बढ़ाने का मंच प्रदान किया और सैनिक खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से एक-दूसरे के और करीब आए। उन्होंने कहा कि उन्हें योग के माध्यम से मानसिक शांति का अनुभव करने का अवसर भी मिला।

कर्नल पुनिया ने बताया कि अत्याधुनिक और विशिष्ट तकनीकों को सैन्य अभियानों में शामिल करने तथा उनके प्रभावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

इस अभ्यास ने इंजीनियरिंग क्षेत्र में भी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर प्रदान किया।

इसमें भाग लेने वाले देशों ने इस तरह के अभ्यास के आयोजन के लिए भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया।

रॉयल भूटान आर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल सांगाय जांत्शो ने कहा, ‘‘हम भारतीय सेना को इस अभ्यास के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद देते हैं। इससे हमें अन्य देशों के सैनिकों के साथ संवाद करने, सीखने और उग्रवाद-रोधी अभियानों के अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला।’’

उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ मिलकर काम करने का यह एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा।

सेशेल्स के लेफ्टिनेंट कर्नल लुईस अगाथिन ने भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में मित्रता को और मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम विचारों का आदान-प्रदान करके खुश हैं और हमने यहां जो कुछ सीखा है, हम उसे अपने देश में लागू करेंगे।’’

उनकी बातों से सहमति जताते हुए फिलीपीन की स्टाफ सार्जेंट मैरी सिमोंगो ने कहा, ‘‘हम इस अभ्यास के लिए भारतीय सेना का हार्दिक धन्यवाद करते हैं। हमें यहां से बहुमूल्य ज्ञान और नए विचार मिले हैं, जिन्हें हम अपने देश लेकर जाएंगे।’’

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी


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