भारत के खिलाफ म्यांमा की धरती का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा: राष्ट्रपति ह्लाइंग

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भारत के खिलाफ म्यांमा की धरती का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा: राष्ट्रपति ह्लाइंग

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 05:44 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 05:44 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) म्यांमा के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आश्वासन दिया कि भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ उनके देश की धरती का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक वार्ता की।

आंग ह्लाइंग पांच दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। म्यांमा में संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय में वह भारत यात्रा पर आए हैं।

सत्ताधारी सैन्य जुंटा के खिलाफ वर्षों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद ये चुनाव दिसंबर और जनवरी में कराए गए।

सैन्य जुंटा ने एक फरवरी, 2021 को तख्तापलट कर आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बेदखल कर दिया था।

सू ची के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यात्रा पर आए राष्ट्रपति के साथ इस मुद्दे को उठाया और चर्चा मुख्य रूप से म्यांमा में जारी शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई थी।

इस मुद्दे पर भारत के निरंतर रुख को स्पष्ट करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत स्थायी शांति, समावेशिता और सभी हितधारकों को बातचीत की मेज पर लाने की आवश्यकता का समर्थन करता रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक खुली और अनौपचारिक चर्चा थी। मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि म्यांमा के साथ हमारा जुड़ाव उस देश की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करने के उद्देश्य से नहीं है।’’

मिसरी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में व्यापार और आर्थिक संबंधों, रक्षा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों, सीमा प्रबंधन, विकास सहायता और क्षेत्रीय हालात सहित द्विपक्षीय मुद्दों की पूरी श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित किया गया।

दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में रुचि व्यक्त की।

विदेश सचिव ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने म्यांमा की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की और दोनों पक्षों ने संप्रभु क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के महत्व पर बल दिया, ताकि ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके जो उनके सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक हों।’’

उन्होंने कहा, ‘‘म्यांमा के राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इस बात को दोहराया कि म्यांमा के क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।’’

म्यांमा भारत के रणनीतिक पड़ोसियों में से एक है और यह उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है।

मिसरी ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर म्यांमा के राष्ट्रपति की इस यात्रा ने एक बार फिर दोनों पक्षों की दीर्घकालिक साझेदारी को गहरा करने और क्षेत्र में पारस्परिक लाभ, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।’’

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की।

म्यांमा के नेता के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगति शामिल हैं। राष्ट्रपति ह्लाइंग दो जून को मुंबई जाएंगे।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश