कोहिमा, 11 अगस्त (भाषा) नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
रियू ने यह भी कहा कि कानून में इन बदलावों से चर्च और ईसाई धर्मार्थ संगठनों पर दबाव पड़ सकता है और राज्य में शैक्षणिक, स्वास्थ्य सेवा तथा समाज कल्याण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधनों को व्यापक समीक्षा के लिए एक संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए और संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों को अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से पारदर्शी, जवाबदेही और राष्ट्रीय हित की रक्षा करते हुए वास्तविक चिंताओं को दूर करने, आशंकाओं को समाप्त करने और जनता का विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।
गृह मंत्री शाह को सोमवार को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के ‘‘समावेशी और सकारात्मक दृष्टिकोण’’ को प्रदर्शित करेगा और संवैधानिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्ष लोकाचार तथा सभी समुदायों के अधिकारों व योगदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा।
इस साल जून में, सरकार ने विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए एफसीआरए नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया था। इसके तहत, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को काम के उद्देश्यों और क्षेत्रों की पूर्व निर्धारित सूची में से चयन करना अनिर्वाय कर दिया गया। धर्म से जुड़ी कई तरह की गतिविधियों की अनुमति देते हुए, इन नियमों में स्पष्ट रूप से धर्मांतरण को उन श्रेणियों से बाहर रखा गया जो एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र हैं।
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और संसद के मानसून सत्र के दौरान इस पर चर्चा होने की संभावना है।
रियू ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से ईसाई समुदाय ने कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि नगालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (एनबीसीसी) और कोहिमा के बिशप ने भी केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपकर चर्च और संबद्ध धर्मार्थ संगठनों के सामने आने वाली कठिनाइयों को रेखांकित किया है।
रियो ने आग्रह किया कि नगालैंड की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक और विकास संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ईसाई धर्मगुरुओं के साथ विचार-विमर्श किया है। इसके बाद नौ अगस्त को एनबीसीसी के पदाधिकारियों और कोहिमा के बिशप के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की।
उन्होंने कहा कि इस दौरान गिरजाघरों और ईसाई संगठनों को अपनी गतिविधियों तथा मानवीय सेवाओं के संचालन में आ रही चुनौतियों को लेकर चिंताएं सामने रखी गईं।
रियो ने कहा कि नगालैंड की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी ईसाई है और राज्य के आध्यात्मिक एवं सामुदायिक जीवन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक कल्याण, आजीविका के साधन उपलब्ध कराने तथा वंचित और कमजोर वर्गों की मदद करने में चर्चों की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रियू ने नगालैंड में ईसाई धर्म और गिरजाघरों के 150 से अधिक वर्षों के इतिहास तथा वैश्विक ईसाई समुदाय के साथ इसके दीर्घकालिक संबंधों को भी रेखांकित किया।
भाषा खारी धीरज
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