जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन
Modified Date: July 20, 2026 / 09:52 pm IST
Published Date: July 20, 2026 9:52 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया और केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च के कारण सुर्खियों में पीछे रह गया।

उमर अब्दुल्ला सुबह जम्मू से दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन कॉजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण वह जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके।

नेकां के लगभग 100 प्रदर्शनकारी हाथों में ‘‘अपना वादा पूरा करो’’ और ‘‘पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो’’ लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

बाद में मुख्यमंत्री कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, जहां जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक संगोष्ठी आयोजित की जानी थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

‘‘रिस्टोर स्टेटहुड’’ लिखी जैकेट पहने उमर अशोक रोड पर सड़क किनारे बैठ गए। इस दौरान कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल कुछ युवा भी उनके साथ बैठ गए।

प्रदर्शनकारियों ने ‘‘मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?’’ जैसे नारे भी लगाए।

पुलिस ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके समर्थक धरने पर बैठे हुए थे।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां बाकी लोगों के साथ हमें भी आंसू गैस का निशाना बनाया गया। यह बेहद शर्मनाक है।’’

उमर ने कहा, ‘‘हम अपने करीब 100 समर्थकों के साथ दिल्ली आए थे ताकि केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर सकें, लेकिन यहां भी हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।’’

उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से न्याय की मांग को लेकर आए युवाओं पर भी आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

उमर ने कहा, ‘‘इन युवाओं को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की परीक्षा के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ा। वे तनाव और दबाव में थे और चाहते थे कि कोई इसकी जिम्मेदारी ले। लेकिन आज उन पर बेरहमी से आंसू गैस छोड़ी गई। यह शर्मनाक है।’’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार को संसद के दोनों सदनों और उच्चतम न्यायालय के समक्ष किए गए वादों की याद दिलाने के उद्देश्य से किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हम केंद्र सरकार को याद दिलाने के लिए दिल्ली आए हैं कि उसने उच्चतम न्यायालय और जनता से वादा किया था कि चुनाव के बाद जल्द से जल्द जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।’’

उमर ने कहा, ‘‘हमें बार-बार बताया जाता है कि उचित समय आने पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि वह उचित समय कब आएगा। देश के दूरदराज हिस्से से आने के कारण हमारी आवाज अक्सर अनसुनी कर दी जाती है, इसलिए आज हमें यहां प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’

पटेल चौक के पास भारी यातायात जाम में उनका काफिला फंसने के बाद उमर बाद में पृथ्वीराज रोड स्थित जम्मू-कश्मीर हाउस तक ऑटो रिक्शा से पहुंचे।

नेकां के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मोदी सरकार से क्षेत्र के लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करने की अपील की।

फारूक ने कहा, ‘‘हम पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसका वादा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने किया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि सरकार जनता की इच्छा का सम्मान करेगी, देश के हित में काम करेगी, लद्दाख के मुद्दों का समाधान करेगी और बिना किसी और देरी के राज्य का दर्जा बहाल करेगी।’’

जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि नेकां और कांग्रेस समेत गठबंधन सहयोगी मजबूरी के कारण दिल्ली आए हैं।

चौधरी ने कहा, ‘‘आपने जम्मू-कश्मीर के लोगों से वादा किया था कि चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। लगभग डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री या गृह मंत्री में से किसी ने भी यह आश्वासन पूरा नहीं किया है। आखिर उचित समय कब आएगा?’’

गौरतलब है कि पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने दिसंबर 2023 में इस फैसले की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन पीठ ने केंद्र सरकार को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया था।

भाषा रवि कांत रवि कांत रंजन

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