छोटे अपराधों से जुड़े अदालती मामले वापस लेने पर विचार करें सरकारी विभाग: वाणिज्य मंत्रालय
छोटे अपराधों से जुड़े अदालती मामले वापस लेने पर विचार करें सरकारी विभाग: वाणिज्य मंत्रालय
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय चाहता है कि सभी विभाग छोटे अपराधों से जुड़े अदालती मामलों को वापस लेने पर विचार करें, ताकि 'जन विश्वास' संशोधन विधेयक के अनुरूप न्यायपालिका पर बोझ कम हो और जीवन की सुगमता को बढ़ाया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात कही।
संसद ने कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने और लोगों के उत्पीड़न को रोकने के लिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन करने और लगभग 1,000 छोटे अपराधों को फौजदारी की श्रेणी से बाहर करने के लिए बृहस्पतिवार को 'जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''कानून में हो रहे बदलावों के कारण इन सभी प्रावधानों की समीक्षा की जा सकती है। हम कानून मंत्रालय के साथ भी यह मुद्दा उठाएंगे और यह तय करेंगे कि संबंधित विभागों को इस बारे में किस तरह अवगत कराया जाए। ''
उन्होंने कहा कि अदालतों पर बोझ कम करने के सामान्य अभियान के तहत, सरकार ने सभी विभागों को लंबित मामलों की समीक्षा करने और जहां संभव हो वहां मुकदमा वापस लेने की सलाह दी है।
इसके साथ ही भाटिया ने कहा, ''सभी लंबित मामलों की समीक्षा के लिए पहले से ही एक सामान्य परामर्श मौजूद है। जहां भी विभागों को लगता है कि मामले बहुत गंभीर नहीं हैं और उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। वे उन्हें वापस लेने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं।''
जन विश्वास संशोधन विधेयक पारित होने पर मीडिया को संबोधित करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अनुमान के मुताबिक छोटे अपराधों से संबंधित पांच करोड़ अदालती मामले लंबित हैं, जिनमें से अधिकांश को कभी अदालत में जाना ही नहीं चाहिए था।
गोयल ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि अभियोजक नए प्रावधानों के आधार पर अदालतों से इन्हें बंद करने का अनुरोध करके इन सबका समाधान कर सकते हैं, ताकि पुराने मामलों में बड़ी राहत दी जा सके। अदालतों से हमारा अनुरोध होगा कि वे उन छोटे अपराधों पर निर्णय लें और उन्हें समाप्त करें।''
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार केंद्रीय स्तर पर सभी कानूनों की दोबारा समीक्षा के लिए आने वाले सुझावों को लेकर खुली सोच रखती है।
उन्होंने कहा, “12 राज्यों ने अपने-अपने ‘जन विश्वास’ विधेयक लाकर राज्य कानूनों में अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की पहल की है। मैं बाकी राज्यों से भी अपील करता हूं कि वे इसका अनुसरण करें और छोटे-मोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने पर विचार करें।”
भाषा पाण्डेय प्रेम
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