श्रीनगर, छह जून (भाषा) सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से पुलवामा जिले के अवंतीपोरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का दौरा किये जाने को शनिवार को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया और कहा कि इससे गलत परंपरा स्थापित होती है।
नेकां के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री ने गैर-निर्वाचित लोगों को अपने विधायकों के साथ बैठक की अध्यक्षता करने का अवसर दिया। इससे बहुत गलत परंपरा स्थापित होती है।’
महबूबा ने शुक्रवार को अवंतीपोरा में निर्माणाधीन एम्स का दौरा किया ताकि निर्माण कार्य की प्रगति के संबंध में ‘जानकारी जुटा’ सकें।
सादिक ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने सत्ता में नहीं रहने के दौरान कभी भी पीडीपी अध्यक्ष की तरह समीक्षा बैठक नहीं की थी।
सादिक ने कहा, ‘उन्होंने (पीडीपी ने) आरएसएस और अन्य लोगों को अपने विधायकों को साथ किसी भी संस्था की समीक्षा बैठक आयोजित करने का रास्ता साफ कर दिया है।’
उन्होंने कहा कि इसके पीछे एक ‘बड़ी तस्वीर’ है।
उन्होंने कहा, ‘जब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 1999 में स्वायत्तता प्रस्ताव पारित किया था, तब एक नयी पार्टी के रूप में पीडीपी का उदय हुआ। आज, जब हम 50 विधायकों ने राज्य का दर्जा और अपने अधिकारों की बहाली के लिए अपील करने दिल्ली जाने का फैसला किया, तो अचानक, गैर-निर्वाचित लोग केंद्र द्वारा वित्त पोषित संस्था की समीक्षा करने पहुंच गए।’
सादिक ने आरोप लगाया कि ‘यह साफ तौर पर बताता है कि उनका किससे संबंध है और उन्हें निर्देश कहां से मिल रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘इस तरह की परंपरा दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बिल्कुल उचित नहीं है।’
पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में एम्स परियोजना की प्रगति की समीक्षा की थी और यह सुनिश्चित किया था कि रुका हुआ निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो।
इस बीच, सज्जाद लोन ने महबूबा मुफ्ती के दौरे को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए उनसे यह स्वीकार करने की मांग की कि उनका यह कदम ‘निर्णय संबंधी त्रुटि’ था।
हंदवाड़ा से विधायक लोन ने चेतावनी दी कि किसी निर्वाचित पद पर न होते हुए भी महबूबा द्वारा उठाया गया यह कदम एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करता है, जिससे जम्मू-कश्मीर में अन्य गैर-निर्वाचित व्यक्तियों द्वारा भी संस्थागत अधिकार ग्रहण करने की कोशिशों का रास्ता साफ हो सकता है।
लोन ने कहा, ‘ऐसी स्थिति में आरएसएस या भाजपा का कोई गैर-विधायक पदाधिकारी भी ऐसा करने से क्यों रुकेगा, खासकर तब जब वे पीडीपी के चार विधायकों की तुलना में अपने 28 विधायकों का हवाला दे सकते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘फारूक अब्दुल्ला साहब, गुलाम नबी आजाद साहब या भाजपा नेता निर्मल सिंह साहब को इसी तरह की बैठकों की अध्यक्षता करने से कौन रोक सकता है? ऐसी सूची लंबी हो सकती है।’
लोन ने आरोप लगाया कि महबूबा मुफ्ती ने अपने इस कदम से कई तरह के ‘राजनीतिक रूप से अवांछनीय तत्वों’ के लिए रास्ता साफ कर दिया है।
लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए कहा कि वह इस स्थिति के लिए ‘आंशिक रूप से जिम्मेदार’ हैं।
लोन ने कहा, ‘यदि मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को विपक्षी विधायकों के खिलाफ नहीं लगाया होता और उनके अधिकारों को कमजोर नहीं किया होता, तो संवैधानिक मर्यादा के उल्लंघन जैसी यह स्थिति शायद पैदा नहीं होती।’
उन्होंने इस तर्क को भी खारिज किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की भूमिका या स्वीकृति से महबूबा की बैठक की अध्यक्षता को वैधता मिल जाती है।
लोन ने कहा, ‘नड्डा साहब भारत के सम्मानित स्वास्थ्य मंत्री हैं लेकिन उनके पास संवैधानिक भूमिकाओं को पुनर्परिभाषित करने का अधिकार नहीं है।’
वहीं, महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा कि उन्होंने एम्स के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा से बात की है।
भाषा
राखी संतोष
संतोष