ब्रिटिशकालीन विरासत स्थलों को संरक्षित करने की जरूरत, राज्य गंभीरता से इस पर काम करें : शेखावत

ब्रिटिशकालीन विरासत स्थलों को संरक्षित करने की जरूरत, राज्य गंभीरता से इस पर काम करें : शेखावत

ब्रिटिशकालीन विरासत स्थलों को संरक्षित करने की जरूरत, राज्य गंभीरता से इस पर काम करें : शेखावत
Modified Date: May 29, 2026 / 02:29 pm IST
Published Date: May 29, 2026 2:29 pm IST

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि ब्रिटिश काल में बने जिला कलेक्ट्रेट, अदालतें, अस्पताल भवन, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में ‘‘अधिक गंभीरता’’ के साथ कदम उठाने का आग्रह किया।

बुधवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में की गई उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न शहरों में उपेक्षा के कारण औपनिवेशिक दौर की कई ऐतिहासिक इमारतें ढहा दी गईं या ध्वस्तीकरण का सामना कर रही हैं।

शेखावत केंद्रीय पर्यटन मंत्री भी हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या मुख्य रूप से प्राचीन स्थलों के संरक्षण पर ध्यान देने वाले विरासत संपत्तियों के संरक्षकों को ब्रिटिश काल की इमारतों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वे भी पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित हो सकती हैं।

इस पर शेखावत ने कहा, ‘‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन 3,686 राष्ट्रीय महत्व के स्थल हैं। इसके अलावा लगभग सभी राज्यों के अपने-अपने पुरातत्व विभाग हैं और प्रत्येक राज्य के पास सूचीबद्ध स्थल एवं संपत्तियां हैं, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी उन्हीं की है।’’

मंत्री ने कहा कि कई किले, महल और ब्रिटिश काल की इमारतें एवं स्थल राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किए जा चुके हैं और उनका संरक्षण संबंधित राज्य सरकारों की ‘‘जिम्मेदारी’’ है।

शेखावत ने कहा कि राज्य सरकारें ‘‘अपने उपलब्ध संसाधनों के अनुसार’’ इन स्थलों के संरक्षण का कार्य करती हैं।

उनसे यह भी पूछा गया कि देश के कई हिस्सों में औपनिवेशिक काल के वे स्थल, जो संरक्षित नहीं हैं और विरासत सूची में शामिल नहीं किए गए, पिछले कुछ वर्षों में ध्वस्त कर दिए गए हैं। साथ ही, एक संसदीय समिति ने भी एएसआई के दायरे से बाहर ब्रिटिशकालीन विरासत स्थलों के संरक्षण की सिफारिश की है।

इस पर शेखावत ने कहा कि देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष से अधिक समय हो चुका है और सामान्य तौर पर ‘‘100 वर्ष से अधिक पुराने स्थलों’’ को विरासत संपत्ति माना जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब देश स्वतंत्र हुआ (1947 में), तब विभिन्न राज्यों में कई ऐसी संपत्तियां थीं जो उस समय केवल 20-40 वर्ष पुरानी थीं, इसलिए संभवतः वे उस स्तर तक नहीं पहुंची थीं कि उन्हें विरासत संरचना माना जाए। ये ब्रिटिश काल की संपत्तियां थीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद अब इन स्थलों को भी संरक्षण की आवश्यकता है। कई शहरों में जिला कलेक्ट्रेट, अदालतें और अस्पताल भवन हैं, जो 100-125 वर्ष पहले बनाए गए होंगे।’’

संस्कृति मंत्री ने कई शहरों और कस्बों के पुराने रेलवे स्टेशन तथा अन्य सार्वजनिक ढांचों का भी उल्लेख किया, जो ‘‘भारत में ब्रिटिश शासन के अंतिम 50 वर्षों’’ के दौरान बनाए गए होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘उस दौर में देश की लगभग सभी रियासतों ने ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार किया था, जिसे आज संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है। कुछ राज्य इस दिशा में काम कर रहे हैं, कुछ निजी संस्थाएं भी इसमें योगदान दे रही हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें इस दिशा में अधिक गंभीरता से कदम उठाएं।’’

भारत में प्राचीन मंदिरों और अन्य स्मारकों से लेकर मध्यकालीन संरचनाओं तथा औपनिवेशिक कालीन इमारतों तक ऐतिहासिक धरोहरों की व्यापक श्रृंखला मौजूद है। इनमें ब्रिटिश शासन, डच काल, फ्रांसीसी, डेनिश और पुर्तगाली उपनिवेशों के दौरान निर्मित भवन भी शामिल हैं।

औपनिवेशिक काल की बड़ी संख्या में इमारतें, खासकर ब्रिटिश दौर में विशिष्ट वास्तुकला शैली में बनी संरचनाएं, आज भी जिला कलेक्ट्रेट, नगर निगम कार्यालय, संग्रहालय, पुस्तकालय और रेलवे स्टेशनों के रूप में उपयोग की जा रही हैं।

हालांकि, विरासत विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य विशेषताओं के बावजूद इन पुरानी इमारतों में से कई को संरक्षित घोषित नहीं किया गया है, जिससे उनके जर्जर होने या ध्वस्तीकरण का खतरा है।

पटना कलेक्ट्रेट परिसर, जिसमें डच काल और ब्रिटिश दौर की संरचनाएं शामिल थीं, अप्रैल 2022 में ध्वस्त कर दिया गया था।

अप्रैल 2016 में भारत में नीदरलैंड के तत्कालीन राजदूत अल्फोंसस स्तोलिंगा ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर पटना कलेक्ट्रेट को न गिराने की अपील की थी। उन्होंने इसे ‘‘भारत और नीदरलैंड की साझा निर्मित विरासत’’ बताया था।

राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और कर्नाटक उन राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने इन ऐतिहासिक स्थलों का उपयोग करते हुए पुराने ब्रिटिशकालीन हवेलियों, बंगलों, महलों और किलों को विरासत होटल या होमस्टे में बदलकर घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है।

भाषा गोला शोभना

शोभना


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