नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-स्नातक) की तीन मई को हुई मूल परीक्षा की तुलना में करीब 2.79 लाख कम अभ्यर्थियों ने पुनर्परीक्षा दी। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित इस परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई को रद्द कर दिया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रहा है।
पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की गई थी।
पुनर्परीक्षा में 19,99,895 अभ्यर्थी शामिल हुए जबकि तीन मई को 22.05 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।
एनटीए ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा का परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित किया। एजेंसी के अनुसार, 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है।
परिणाम संबंधी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वर्ष की तुलना में पंजीकरण की संख्या लगभग समान रही, लेकिन इस बार उल्लेखनीय संख्या में अभ्यर्थियों ने पुनर्परीक्षा नहीं दी।
नीट-स्नातक 2026 के लिए 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। यह संख्या 2025 में हुए 22.76 लाख पंजीकरण से मामूली रूप से अधिक है। हालांकि, केवल 19.99 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और 2,79,848 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित होने वाले अभ्यर्थियों की यह अब तक की सबसे अधिक संख्या है।
कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान 2020 में हुई परीक्षा में 2.30 लाख अभ्यर्थी शामिल नहीं हुए थे।
तीन मई को आयोजित मूल परीक्षा में 22.05 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे और उपस्थिति 96.72 प्रतिशत रही थी।
पुनर्परीक्षा में अभ्यर्थियों की उपस्थिति 87.72 प्रतिशत रही, जो 2020 के बाद से दर्ज की गई दूसरी सबसे कम उपस्थिति है।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक देश की सबसे बड़ी स्नातक प्रवेश परीक्षा है। इस महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए करीब 25 लाख अभ्यर्थी पंजीकरण कराते हैं।
एनटीए चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए हर वर्ष नीट आयोजित करता है। एमबीबीएस पाठ्यक्रम में 1,08,000 सीट उपलब्ध हैं। इनमें करीब 56,000 सीट सरकारी अस्पतालों और लगभग 52,000 सीट निजी महाविद्यालयों में हैं।
दंत चिकित्सा, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी नीट के परिणाम का इस्तेमाल किया जाता है।
भाषा
सिम्मी शफीक
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