Kailash Mansarovar Yatra News: क्या इस बार नहीं होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा? नेपाल सरकार लगा रही अड़ंगा, भारत को प्रोटेस्ट नोट लिखकर कही ये बड़ी बात

Kailash Mansarovar Yatra News: बालेन सरकार का ये प्लोमैटिक प्रोटेस्ट नोट लिपुलेक पास से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के संचालन से जुड़ा हुआ है

Kailash Mansarovar Yatra News: क्या इस बार नहीं होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा? नेपाल सरकार लगा रही अड़ंगा, भारत को प्रोटेस्ट नोट लिखकर कही ये बड़ी बात

Kailash Mansarovar Yatra News/Image Credit: X Handle

Modified Date: May 3, 2026 / 11:07 pm IST
Published Date: May 3, 2026 11:02 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बालेन सरकार ने भारत और चीन को डिप्लोमैटिक प्रोटेस्ट नोट भेजा है।
  • प्रोटेस्ट नोट लिपुलेक पास से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के संचालन से जुड़ा हुआ है।
  • लिपुलेक के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा चलाने की योजना पर नेपाल सरकार ने आपत्ति जताई है।

Kailash Mansarovar Yatra News: नई दिल्ली: नेपाली की बालेन सरकार ने भारत और चीन को डिप्लोमैटिक प्रोटेस्ट नोट भेजा है। इस प्रोटेस्ट नोट से जुड़े मामले के चलते कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों को झटका लग सकता है। बालेन सरकार का ये प्लोमैटिक प्रोटेस्ट नोट लिपुलेक पास से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के संचालन से जुड़ा हुआ है, जिस पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाल की तरफ से कहा गया है कि, यह इलाका उसकी भूमि का हिस्सा है और इस पर कोई भी गतिविधि स्वीकार नहीं है।

नेपाल सरकार ने बढ़ाई भारत और चीन की टेंशन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्री ने साफ कर दिया है कि, लिपुलेक के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा चलाने की योजना पर उन्हें सख्त आपत्ति है। नेपाल का कहना है कि यह उनकी जमीन है और बिना उनकी मर्जी के वहां कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए। इस मुद्दे पर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि यह फैसला किसी एक नेता का नहीं है, (Kailash Mansarovar Yatra News) बल्कि नेपाल की सभी राजनीतिक पार्टियों से बातचीत करने के बाद ही यह ‘प्रोटेस्ट नोट’ भेजा गया है। यानी पूरा नेपाल इस मुद्दे पर एक सुर में बात कर रहा है।

Kailash Mansarovar Yatra News:  इसी के साथ सबके मन में ये सवाल आ रहा है कि, नेपाल ने आखिर इतना सख्त रूप क्यों अपनाया है? इस सवाल का जवाब 1816 की ‘सुगौली संधि’ में छिपा हुआ है। नेपाल सरकार का दावा है कि इस संधि के हिसाब से महाकाली नदी के पूर्व में पड़ने वाला लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी का पूरा इलाका नेपाल का हिस्सा है। नेपाल इस बात पर पूरी तरह अडिग है कि ये जगहें उसके नक्शे का अभिन्न अंग हैं।

नेपाल ने दोनों देशों को सुनाई खरी-खरी

नेपाल की तरफ से जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है, उसमे साफ़ लिखा है कि, उन्होंने अपना रुख भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक रास्तों से बता दिया है।बालेन सरकार का कहना है कि, वे पहले भी कई बार भारत सरकार से कह चुके हैं कि, इस इलाके में सड़क बनाना, व्यापार करना या तीर्थयात्रा जैसी कोई भी चीज न की जाए। (Kailash Mansarovar Yatra News) वहीं जब बात आगे बढ़ी, तो नेपाल ने अब औपचारिक विरोध दर्ज करा दिया है।

वहीं बताया जा रहा है कि, यह विवाद काफी पुराना भी है। नेपाल अक्सर लिपुलेक और कालापानी को लेकर अपना दावा ठोंकता रहा है, लेकिन इस बार बालेन सरकार का अंदाज थोड़ा जुदा है, क्योंकि उन्होंने भारत के साथ-साथ चीन को भी लपेटे में ले लिया है। नेपाल का मानना है कि इस क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशीलता को दोनों बड़े देशों को समझना चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पड़ेगा असर

Kailash Mansarovar Yatra News:  अब जब देखने वाली बात है कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होगी तो नेपाल का यह ‘प्रोटेस्ट नोट’ क्या मोड़ लेगी। (Kailash Mansarovar Yatra News) फिलहाल तो नेपाल ने अपनी जमीन का हवाला देकर दिल्ली और बीजिंग की टेंशन बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि भारत और चीन इस कूटनीतिक चिट्ठी का क्या जवाब देते हैं।

इन्हे भी पढ़ें:-


लेखक के बारे में

I am a content writer at IBC24 and I have learned a lot here so far and I am learning many more things too. More than 3 years have passed since I started working here. My experience here has been very good.