नेपाल में पत्नी की मौत को लेकर मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 26 फरवरी को

नेपाल में पत्नी की मौत को लेकर मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 26 फरवरी को

नेपाल में पत्नी की मौत को लेकर मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 26 फरवरी को
Modified Date: February 9, 2026 / 10:05 pm IST
Published Date: February 9, 2026 10:05 pm IST

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को गाजियाबाद के एक उद्योगपति की उस याचिका को 26 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जिसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने लापरवाही बरती, जिसकी वजह से पिछले साल नेपाल के काठमांडू में ‘जेन-जेड’ प्रदर्शन के दौरान उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई।

याचिकाकर्ता रामबीर सिंह गोला ने नौ सितंबर, 2025 को अपनी पत्नी की ‘दुखद और टाली जा सकने वाली’ मौत के लिए ना केवल केंद्र सरकार और हयात होटल से क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 75 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की, बल्कि घटना की जांच के लिए एक ‘उच्च स्तरीय’ न्यायिक आयोग गठित करने का अनुरोध भी किया।

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने सवाल किया, ‘‘हम इसकी पड़ताल कैसे कर सकते हैं?’ उन्होंने कहा कि जब तक अनुरोध में ‘बदलाव’ नहीं किया जाता, अदालत मामले में आगे नहीं बढ़ पाएगी।

अदालत ने कहा, ‘नेपाल में कुछ होता है। होटल आपसे कुछ करने के लिए कहता है। हम कैसे तय कर सकते हैं?’’

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अधिकारियों का बर्ताव संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मूलभूत अधिकार के साथ-साथ विदेश में नागरिकों को सुरक्षा देने पर वियना संधि का भी उल्लंघन है।

अदालत ने सवाल किया, ‘‘अगर मैं कहीं जाता हूं, तो संरक्षण (धारा 21 के तहत) कैसे उपलब्ध होगा?”

अदालत ने कहा, “आप अपने अनुरोध में बदलाव करिए। वर्तमान स्वरूप में, मुझे नहीं लगता कि मैं आपकी रिट याचिका पर आगे बढ़ सकता… बस सोचिए। इस मामले को दो सप्ताह बाद लिया जाएगा।”

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता अपनी पत्नी के साथ नेपाल तीर्थयात्रा पर था और सितंबर 2025 में काठमांडू के हयात रीजेंसी होटल में ठहरा हुआ था।

याचिका में यह आरोप लगाया गया कि संकट में होने के बारे में बार-बार संदेश दिये जाने और संभावित खतरे के बावजूद भारतीय दूतावास या विदेश मंत्रालय ने वहां से निकालने के लिए कोई मदद नहीं की। अधिकारियों ने अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन नहीं किया और याचिकाकर्ता को ‘विदेश में असहाय’ छोड़ दिया।

याचिका में यह भी कहा गया कि होटल प्रबंधन ने ईमानदार जोखिम मूल्यांकन देने या सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के बजाय ‘जानबूझकर भ्रामक जानकारी दी और गंभीर लापरवाही’ की।

याचिका में अधिकारियों और हयात होटल से औपचारिक, सार्वजनिक माफी की भी मांग की गई।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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