New Rules For Employees: मीडिया डिबेट से लेकर बयान तक.. अब सरकारी कर्मचारी नहीं कर पाएंगे ये काम, भाजपा सरकार ने लाया नया नियम, जानें यहां
मीडिया डिबेट से लेकर बयान तक.. अब सरकारी कर्मचारी नहीं कर पाएंगे ये काम, New Rules For Employees in Bengal
New Rules For Employees. Image Source- IBC24
कोलाकाताः New Rules For Employees: अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या उनके परिवार से हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। दरअसल, बंगाल की शुभेंदु सरकार ने कर्मचारियों के लिए एक नया आदेश जारी किया है। सरकारी कर्मचारियों के मीडिया में बयान देने, मीडिया डिबेट में भाग लेने, सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करने और यहां तक कि सरकार की महत्वपूर्ण जानकारी लीक करने पर बैन लगा दिया है। इसे लेकर प्रदेश में सियासत भी गर्म हो गई है।तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस आदेश को “लोकतंत्र का गला घोंटने वाला कदम” बताया है।
New Rules For Employees: राज्य कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी आदेश में सरकारी कर्मचारियों के मीडिया में बयान देने, मीडिया डिबेट में हिस्सा लेने, सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करने तथा संवेदनशील सूचनाएं लीक करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि ये नियम पहले से लागू अखिल भारतीय सेवा (AIS) आचरण नियम 1968, पश्चिम बंगाल सेवा नियम 1980 तथा पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम 1959 के प्रावधानों के तहत लागू किए गए हैं। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध राज्य सरकार से जुड़े सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS), पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा (WBPS) अधिकारियों के अलावा अन्य सरकारी कर्मचारियों, सुधार सेवा कर्मियों, राज्य सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, नगर निकायों, नगर निगमों और राज्य सरकार के अधीन स्वायत्त संस्थाओं पर भी लागू होगा।
इस आदेश के खिलाफ गुरुवार को अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यह आदेश अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की आवाज दबाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को प्रेस से बातचीत करने, लेख लिखने, मीडिया कार्यक्रमों में शामिल होने और केंद्र या राज्य सरकार की आलोचना करने से रोका जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “सरकार ने अब प्रशासनिक व्यवस्था में चुप्पी को अनिवार्यता बना दिया है।” अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि जब कोई सरकार आलोचना सहन नहीं कर पाती, तब वह असहमति को दबाने लगती है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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