नये अध्ययन में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक राशि आवंटन की जरूरत बताई गई
नये अध्ययन में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक राशि आवंटन की जरूरत बताई गई
नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले आई एक नई अध्ययन रिपोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अधिक खर्च की लंबे समय से उठ रही मांग को ठोस आधार दिया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सामाजिक-आर्थिक कारक चिकित्सा खर्च बढ़ा रहे हैं और इलाज तक पहुंच में असमानता और गहरी होती जा रही है।
पिछले वर्ष दिसंबर में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडवांस्ड रिसर्च’ में प्रकाशित अध्ययन, ‘इंपैक्ट ऑफ डेटरिमेंट्स ऑफ हेल्थकेयर एक्सपेंडिचर इन इंडिया: एआरडीएल बाउंड्स टेस्टिंग एप्रोच’ भारत में स्वास्थ्य सेवा व्यय को आकार देने वाले कारकों का आकलन करने के लिए 1991 से 2023 तक के राष्ट्रीय आंकड़ों का विश्लेषण करता है, जिसमें प्रति व्यक्ति कुल खर्च और परिवारों द्वारा जेब से किए गए भुगतान (ओओपी) दोनों शामिल हैं।
उन्नत अर्थमितीय प्रारूप का उपयोग करते हुए, लेखकों का तर्क है कि आय वृद्धि, शहरीकरण, शिक्षा स्तर, मुद्रास्फीति और जीवन प्रत्याशा, इन सभी का स्वास्थ्य देखभाल खर्च पर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
निष्कर्ष बताते हैं कि भारत की विकास यात्रा स्वयं संरचनात्मक रूप से स्वास्थ्य देखभाल लागत को ऊपर की ओर धकेल रही है, जिससे निजी देखभाल पर निर्भर परिवारों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ रहा है।
इस अध्ययन में परिवारों के चिकित्सा खर्च को कम करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक राशि आवंटन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
भाषा नेत्रपाल सुरेश
सुरेश

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