एनजीटी ने खेत से रेत हटाने के बहाने हो रहे अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए

एनजीटी ने खेत से रेत हटाने के बहाने हो रहे अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए

एनजीटी ने खेत से रेत हटाने के बहाने हो रहे अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए
Modified Date: July 21, 2026 / 07:19 pm IST
Published Date: July 21, 2026 7:19 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि मानसून के बाद खेतों में जमा रेत को हटाने के बहाने जो व्यावसायिक खनन किया जाता है, उसपर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक नियामक व्यवस्था की जाए।

इस मामले से जुड़ी कई अर्जियों पर सुनवाई कर रहे हरित अधिकरण ने खेत में रेत जमा होने और उसके खनन पर नजर रखने के लिए उपग्रह से ली गई तस्वीरों और कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 17 जुलाई को सुनाए गये अपने आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 2024 में हरित अधिकरण को उन सरकारी अधिसूचना और नियमों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत खेत से रेत हटाई जा सकती है। आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई।

इसमें कहा गया है कि न्यायालय ने अवैध खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी।

पीठ ने कहा कि प्रभावी नियमन सुनिश्चित करने के लिए हरित अधिकरण ने पूर्व में कुछ निर्देश जारी किए थे तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मई 2026 में यह हलफनामा सौंपा था कि उसने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सलाह-मशविरा करने के बाद एक ढांचा तैयार किया है।

अधिकरण ने कहा कि मंत्रालय ने अपने हलफनामे में बताया कि 2026 में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने इस बात पर जोर दिया था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भौगोलिक और स्थलाकृतिक परिस्थितियों की विविधता को देखते हुए एक समान व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है।

पीठ ने कहा कि हालांकि समिति ने कई सुझाव दिए हैं, जिनमें भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना या सतह से नीचे खुदाई या खनन पर रोक लगाना, रेत की मात्रा का आकलन करना, अवैध खनन रोकने के उपाय करना, वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी व्यवस्था तैयार करना, और रेत हटाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करना शामिल है।

अधिकरण ने कहा, ‘‘मानसून के बाद खेत से रेत हटाने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस तरह की सफाई के नाम पर कोई अवैध खनन न हो, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए ढांचे के तहत नियामक व्यवस्था तैयार करनी होगी। यह ढांचा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य नियामक एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है।’’

अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए ढांचे के अनुसार उपयुक्त नियम तैयार करें।

अधिकरण ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है और उन्हें तैयार किए गए ढांचे के साथ अपनी प्रतिक्रियाएं दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर के लिए निर्धारित की गई है।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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