नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को परिवेशी वायु में तीन नये प्रदूषकों की जांच के तरीकों को मानकीकृत करने के लिए 10 हफ्ते का समय दिया है।
परिवेशी वायु में शामिल इन तीन नये प्रदूषकों में एल्युमिनियम, लोहा और सिलिका शामिल हैं।
देश का शीर्ष प्रदूषण निगरानी निकाय फिलहाल राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूए) के तहत 12 प्रमुख प्रदूषकों के स्तर पर नजर रखता है। इनमें कणीय पीएम-10, पीएम-2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2), अमोनिया (एनएच3), जमीनी स्तर पर ओजोन (ओ3), कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), सीसा (पीबी), बेंजीन, बेंजो (ए) पाइरीन, आर्सेनिक और निकल शामिल हैं।
सीपीसीबी ने एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की। यह पीठ हरियाणा में एक सीमेंट फैक्टरी की ओर से पर्यावरणीय मानकों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है।
पीठ ने 21 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में परिवेशी वायु में एल्युमिनियम, लोहा और सिलिका जैसे अतिरिक्त प्रदूषकों के नमूने लेने और उनके विश्लेषण की प्रक्रिया को मानकीकृत करने के लिए आठ हफ्ते का और समय मांगा है।”
उसने पीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि “सीपीसीबी वर्तमान में परिवेशी वायु में अतिरिक्त प्रदूषकों यानी एल्युमिनियम, लोहा और सिलिका के नमूने लेने और उनके विश्लेषण की प्रक्रिया को मानकीकृत करने की प्रक्रिया में है, जिसमें आठ हफ्ते का और समय लग सकता है।”
रिपोर्ट में कहा गया है, “इसलिए विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया जाता है कि परिवेशी वायु में एल्युमिनियम, लोहा और सिलिका की जांच की प्रक्रिया को मानकीकृत करने तथा नये नमूनों के संग्रह एवं विश्लेषण के लिए सीपीसीबी को 10 हफ्ते का समय दिया जाए।”
पीठ ने सीपीसीबी का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश