नयी दिल्ली, दौ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने असम में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए लगभग 1,600 वन सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का निर्देश देने वाले प्रदेश सरकार के आदेश पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। कोलकाता स्थित एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया।
पीठ में न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल थे।
पीठ, राज्य सरकार के 19 मार्च के उस आदेश के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए असम पुलिस की सहायता में वनकर्मियों की तैनाती का निर्देश दिया गया था।
वकील गौरव बंसल द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया कि असम वन सुरक्षाकर्मियों को जैविक संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षा के उनके प्राथमिक कर्तव्यों से हटाकर चुनाव व संबंधित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर अधिकारियों ने जैविक विविधता अधिनियम के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया।
याचिका में दावा किया गया कि इस आदेश से वनों की सुरक्षा व संरक्षण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की इतनी बड़ी संख्या में तैनाती से असम के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील वनों में अवैध शिकार, वन्यजीवों की तस्करी और लकड़ी की कटाई के प्रति असुरक्षा बढ़ जाएगी।
अधिकरण ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन आरोपों से पर्यावरण से संबंधित ‘महत्वपूर्ण प्रश्न’ उठते हैं।
एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, असम सरकार, राज्य के जैव विविधता बोर्ड और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को नोटिस जारी किए।
इस मामले की सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख तय की गई, जिसमें प्रतिवेदन और दलीलें सुनी जाएंगी।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
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