कोच्चि, 21 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के शिक्षा विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
एनआईए ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि पीएफआई के राष्ट्रीय प्रभारी ने हथियार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था और आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार किया था।
विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश एम. के. मोहनदास ने शुक्रवार को पीएफआई के शिक्षा विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी और प्रतिबंधित संगठन से संबद्ध अखिल भारतीय इमाम परिषद के उपाध्यक्ष अशरफ उर्फ करमन्ना अशरफ मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मौलवी पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के संबंध में दर्ज मामले में दूसरा आरोपी है। वह पलक्कड़ में आरएसएस नेता श्रीनिवासन की हत्या में भी आरोपी है।
जमानत याचिका का विरोध करते हुए एनआईए ने कहा कि अशरफ ने आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने की तैयारी के तहत कोच्चि के पेरियार घाटी और त्रिवेंद्रम एजुकेशनल सर्विसेज ट्रस्ट (टीईएसटी) में पीएफआई द्वारा दिए गए हथियार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया था।
एनआईए की आपत्तियों का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया है कि संरक्षण प्राप्त गवाह संख्या तीन के बयान से पता चलता है कि अशरफ ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 15वें आरोपी मोहम्मद मुबारक के माध्यम से पेरियार घाटी में सशस्त्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया था।
आदेश में एजेंसी के बयान का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘‘29 दिसंबर, 2022 को मुबारक के आवास की तलाशी के दौरान तीन तलवारें और एक कुल्हाड़ी जब्त की गई। यह भी बताया गया कि एक कुल्हाड़ी का इस्तेमाल पीएफआई कार्यकर्ताओं ने केरल में प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने में किया था जिसकी जांच एनआईए कर रही है।’’
एनआईए ने बताया कि अशरफ, अन्य आरोपियों के साथ, श्रीनिवासन की हत्या से संबंधित साजिश में शामिल था।
भाषा सुरभि शोभना
शोभना