नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने के आरोपी छह यूक्रेनी नागरिकों समेत सात विदेशी नागरिकों की एनआईए हिरासत शुक्रवार को 10 दिन के लिए बढ़ा दी।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मुख्यालय में सुनवाई करने वाले एजेंसी के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने निर्देश दिया कि आरोपियों को हिरासत में पूछताछ पूरी होने के बाद छह अप्रैल को अदालत में पेश किया जाए।
शुक्रवार सुबह न्यायाधीश ने छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही को एजेंसी के मुख्यालय में आयोजित करने को अनुमति दी।
अदालत ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने से संबंधित है और इसकी जांच अत्यंत संवेदनशील है, जिसका वैश्विक प्रभाव भी है।
अदालत ने 16 मार्च को आरोपियों को 11 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया था। आरोपियों की पहचान अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिकों हुर्बा पेत्रो, स्लिवियक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकीव मरियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर के रूप में हुई है।
अदालत के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को विदेशी नागरिकों ने निष्पक्ष न्यायिक कार्यवाही के लिए स्वतंत्र अनुवादक मुहैया कराने की याचिका दायर की।
सोलह मार्च की हिरासत याचिका में जांच अधिकारी ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा था कि कुछ यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर पर्यटन वीज़ा पर भारत आए और गुवाहाटी पहुंचे, जहां से उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जैसे ‘रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट” या ‘प्रोटेक्टेड एरिया परमिट’ प्राप्त किए बिना मिजोरम की यात्रा की।
याचिका में कहा गया है कि इसके बाद, इन व्यक्तियों ने म्यांमा में अवैध रूप से प्रवेश किया और वहां ‘एथनिक आर्म्ड ऑर्गनाइजेशन’ के लिए निर्धारित प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।
हिरासत को मंजूरी देने वाले अपने आदेश में अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को टुकड़ों में देखकर नहीं समझा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि प्राथमिकी में आरोपियों द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र मिज़ोरम की बिना अनुमति यात्रा करने और उसके बाद म्यांमा में अवैध प्रवेश करने का जिक्र है। यह भी बताया गया है कि आरोपियों का म्यांमा की एथनिक आर्म्ड ऑर्गनाइजेशन से संबंध है और वे हथियारों की आपूर्ति करके और प्रशिक्षण देकर कुछ प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही संगठनों की मदद कर रहे हैं।”
आदेश में कहा गया कि ये आरोप निश्चित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और देशहित से जुड़े हैं और ये व्यापक रूप से गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम की धारा 18 (साजिश के लिए सजा) के अंतर्गत आते हैं।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष