एनआईटी राउरकेला ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली पेटेंट करायी
एनआईटी राउरकेला ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली पेटेंट करायी
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग आने वाली बैटरियों की दक्षता और जीवनकाल को बेहतर बनाने के लिए एक हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली का पेटेंट हासिल कर लिया है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाज़ारों में से एक है। पेट्रोल के घटते भंडार और सरकार की पहलों—जैसे कि ‘राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना’ तथा भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने एवं उनका निर्माण करने की (एफएएमई)योजना–ने देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है।
एनआईटी-राउरकेला के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर मोनालिसा पटनायक के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों को बैटरी पैक से ऊर्जा मिलती है।
उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी, रिचार्ज होने वाली ऊर्जा भंडारण प्रणाली होती है, जो हजारों अलग-अलग सेल को आपस में जोड़कर बनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि जब बैटरी पर अचानक बहुत ज्यादा करंट का दबाव पड़ता है, तो उसकी क्षमता प्रभावित होती है, इससे बैटरी कम ऊर्जा दे पाती है, उसकी उम्र घटती है और वह ज्यादा गर्म होने लगती है।
पटनायक ने कहा, ‘‘ ये समस्याएं खास तौर पर शहरों में ज्यादा गंभीर होती हैं, जहां वाहनों को बार-बार रुकना और चलना पड़ता है। इसके अलावा, उन्हें अचानक तेज गति पकड़नी और फिर जल्दी धीमा होना पड़ता है। इन परिस्थितियों का बैटरी सेल पर बुरा असर पड़ सकता है और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है।’’
उन्होंने कहा कि इन कमियों को दूर करने के लिए बैटरी पैक के साथ अक्सर ‘हाई-पावर-डेंसिटी सुपरकैपेसिटर’ जोड़ा जाता है तथा दोनों को मिलाकर एक हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली बनायी जाती है।
सुपरकैपेसिटर इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोलाइट के बीच की सतह पर विद्युत आवेश को जमा करते हैं। यही वजह है कि वे कुछ ही सेकंड में ‘चार्ज’ और ‘डिस्चार्ज’ हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इनकी खासियत यह है कि ये सामान्य बैटरियों की तुलना में कई गुना ज्यादा ‘पावर’ बहुत तेजी से दे सकते हैं।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश

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