एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की समयसीमा फिर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव, एनएमसी ने मांगी राय

एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की समयसीमा फिर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव, एनएमसी ने मांगी राय

एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की समयसीमा फिर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव, एनएमसी ने मांगी राय
Modified Date: May 31, 2026 / 02:03 pm IST
Published Date: May 31, 2026 2:03 pm IST

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम (जीएमईआर), 2023 में संशोधन का प्रस्ताव किया है, जिससे एमबीबीएस छात्रों को अनिवार्य ‘रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप’ सहित पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिकतम 10 वर्ष का समय मिले।

इस प्रस्ताव के लागू होने से वर्ष 2023 से पहले लागू समयसीमा प्रभावी रूप से बहाल हो जाएगी।

आयोग ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए मसौदा संशोधन में हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, प्रथम व्यावसायिक एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए छात्रों को अधिकतम चार प्रयास ही मिलेंगे। यह प्रावधान पहले की तरह यथावत रहेगा। इसके अनुसार हालांकि, छात्रों को प्रवेश की तिथि से लेकर इंटर्नशिप अवधि सहित स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक का समय दिया जाएगा।

यह प्रावधान एनएमसी के ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट (एफएमजीएल) विनियम, 2021 के अनुरूप है।

एनएमसी की ओर से 18 मई को जारी मसौदा संशोधन में कहा गया है, ‘‘किसी भी परिस्थिति में छात्र को प्रथम वर्ष (प्रथम व्यावसायिक एमबीबीएस) परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए चार से अधिक प्रयासों की अनुमति नहीं होगी और कोई भी छात्र एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश की तिथि से 10 वर्ष (सतत रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप सहित) के बाद स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम जारी नहीं रख सकेगा।’’

जून 2023 में एनएमसी ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की अधिकतम अवधि 10 वर्ष से घटाकर नौ वर्ष कर दी थी।

एक अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित छूट से उन छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है जिन्हें पढ़ाई में बाधाओं, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों, व्यक्तिगत आपात स्थितियों या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इससे उन्हें अपनी पात्रता गंवाए बिना चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के लिए अवसर मिलेगा।

अधिकारी ने बताया कि मसौदा विनियमों पर प्राप्त सुझावों और टिप्पणियों पर विचार करने के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

भाषा रवि कांत रवि कांत अमित

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