विशेष परिस्थितियों में जमानत के लिए सीधे उच्च न्यायालय जा सकते हैं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
विशेष परिस्थितियों में जमानत के लिए सीधे उच्च न्यायालय जा सकते हैं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 18 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक कंपनी मालिक की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में संबंधित सत्र न्यायालय का रुख किए बिना सीधे उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की जा सकती है।
न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत के समक्ष आंध्र प्रदेश निवासी याचिकाकर्ता पोन्नुरु श्री निवासालु (64) के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है और उसे गलत मंशा से झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता 21 मार्च 2026 से जेल में बंद है।
वकील ने बताया कि शिकायतकर्ता की कंपनी की ललितपुर में अच्छी पैठ है और उसे सिंचाई विभाग की ओर से ललितपुर में पुनर्वास एवं आधुनिकीकरण से जुड़ी कई परियोजनाओं के ठेके मिले हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता की कंपनी में कार्यरत कई कर्मचारी ललितपुर में रहते हैं और वे शिकायतकर्ता तथा कंपनी के निदेशक के प्रति निष्ठावान हैं।
उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता दोनों आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के निवासी है तथा मौजूदा प्राथमिकी याचिकाकर्ता को केवल प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है।
वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के पैरोकारों को स्थानीय भाषा की समझ नहीं है और कंपनी के स्थानीय कर्मचारियों द्वारा उन्हें बार-बार निशाना बनाया जाता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता पूर्व विधायक हैं और ललितपुर में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव है।
अदालत ने अभिलेखों पर गौर करने के बाद कहा, ‘‘मैंने दोनों पक्षों को सुना और अभिलेखों को समझा। इससे पता चलता है कि प्राथमिकी छह अगस्त 2025 को दर्ज की गई थी, लेकिन उसमें घटना की तिथि या समय का कोई उल्लेख नहीं है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘प्राथमिकी में आरोप है कि घटना 2014 और 2016 के बीच हुई थी, जबकि प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई अत्यधिक देरी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। इसके अलावा, प्राथमिकी में चेक का कोई विवरण या राशि का उल्लेख भी नहीं है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘प्राथमिकी में इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं है कि पहले से हस्ताक्षर किए हुए चेक खो जाने की सूचना पुलिस को देने या बैंक को उनका भुगतान रोकने के संबंध में शिकायतकर्ता ने क्या कदम उठाए। इसलिए याचिकाकर्ता को झूठे मामले में फंसाए जाने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।’’
न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘यह अदालत इन विशेष परिस्थितियों की मौजूदगी से संतुष्ट है और शिकायतकर्ता के वकील द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों को दरकिनार करती है।’’
अदालत ने कहा कि उपरोक्त सभी तथ्यों, परिस्थितियों और आरोपों की प्रकृति पर विचार करने के बाद याचिकाकर्ता को जमानत दिए जाने का मामला बनता है।
अदालत ने कहा कि इस आधार पर जमानत याचिका मंजूर की जाती है।
भाषा सं राजेंद्र खारी
खारी

Facebook


